डोडा चूरा की तर्ज पर गारनेट की तस्करी: खदानों में 8 साल से काम ठप, फिर भी कागजों में हजारों टन उत्पादन

प्रदेश में कीमती खनिज गारनेट (रेत का सोना) का बड़ा घोटाला सामने आया है। हालात ये हैं कि गारनेट को खपाने के लिए अब डोडा चूरा की तर्ज पर इसकी तस्करी की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन खदानों पर बरसों से एक पत्थर तक नहीं टूटा है, वहां कागजों में हजारों टन उत्पादन बताकर रवन्ना काटे जा रहे हैं। यह पूरा खेल अधिकारियों की घोर लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।

दूसरी और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल बिना जांच के आंख मूंदकर अनुमतियां बांट रहा है। स्थिति यह है कि खनन की अनुमति किसी और के नाम पर है और पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) किसी अन्य के नाम से जारी कर दी गई है। यह महाघोटाला केवल भीलवाड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि अजमेर जिले के सरवर गांव में भी धड़ल्ले से चल रहा है।

प्रमुख खुलासे: कागजों में दौड़ रहे 30-30 टन के ट्रक

1. भीलवाड़ा (कोदूकोटा): 8 साल से काम बंद, फिर भी कट रहे रवन्ना

भीलवाड़ा के कोदूकोटा स्थित खदान में पिछले आठ साल से खनन गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। मौके पर कोई काम नहीं हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद हर माह हजारों टन के रवन्ना काटे जा रहे हैं। खनिज विभाग सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है क्योंकि लीजधारक एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति है।

2. अजमेर (सरवर गांव): उत्पादन के फर्जी आंकड़ों की बाजीगरी

सरवर गांव में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने माइनिंग प्लान को बिना देखे ही उत्पादन की अनुमतियां जारी कर दीं।

– एमएल नंबर 20ए-2000 सरवर: पांच हेक्टेयर की इस खदान में प्रति वर्ष 1.54 लाख टन गारनेट उत्पादन की अनुमति दे दी गई। इस स्वीकृति का मतलब है कि यहां से प्रतिदिन कम से कम 30 गाड़ियां प्रति दिन में 30 टन गारनेट भरनी चाहिए।

– एमएल नंबर 63ए-2003 सरवर: इसी इलाके की इस खदान में 1.39 लाख टन गारनेट का उत्पादन दर्शाया गया है।

3. नाम किसी का, काम किसी का

एमएल 44ए-2001 खदान के मामले में सबसे बड़ी विसंगति सामने आई है। इस खदान को कंसेंट टू ऑपरेट हाल ही में 7 मार्च 2024 को मिला है, जबकि इसकी पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) 1 जून 2017 को ही ‘शेरमोहम्मद’ के नाम से जारी हो चुकी थी। मजेदार बात यह है कि वर्तमान में यह खदान ‘नर्मदा स्टोन प्रा. लि. के नाम पर पंजीकृत है। हालांकि इसका वार्षिक उत्पादन 1050 टन है।

ड्रोन सर्वे हो तो बेनकाब होंगे सफेदपोश

खनिज विभाग के एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पत्रिका को बताया कि अगर राज्य सरकार प्रदेश की सभी गारनेट खदानों के लीजधारकों को नोटिस जारी कर खदानों का ‘ड्रोनसर्वे’ करवा ले, तो इस महाघोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। सर्वे में स्पष्ट हो जाएगा कि कई खदानों से एक टन गारनेट भी नहीं निकला है, जबकि कागजों में हजारों टन गारनेट बेचकर सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है।