जयपुर। प्रदेश में एसआइआर के बाद जनगणना की तैयारी के बीच ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए घर-घर सर्वे की कवायद तेज हो गई है। पंचायत व नगरीय निकाय चुनावों से पहले यह सर्वे ऑनलाइन माध्यम से कराने की योजना है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए मोबाइल एप विकसित किया है, जिसमें लगभग 20 बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित की जाएगी। जिला कलक्टरों को प्रारंभिक तैयारियों के निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही आयोग ने आगे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ साझा किया है।
सरकार ने पंचायत व नगरीय निकाय चुनावों की समयसीमा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। पंचायत राज विभाग के सचिव जोगाराम की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई, जिसमें पंचायत, नगरीय निकाय, चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग के अधिकारियों ने विस्तृत चर्चा की। इसमें निर्णय लिया गया कि न्यायालय में ओबीसी सर्वे की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय मिल सके। सूत्रों के अनुसार यदि पर्याप्त समय मिला, तो इसी सर्वे के आधार पर प्रदेश में ओबीसी आरक्षण तय किया जाएगा।
ऐसे कराया जाएगा सर्वे
अब प्रस्तावित व्यवस्था के तहत “राजधरा” एप के जरिए ओबीसी आरक्षण के लिए सर्वे कराया जाएगा। जनाधार डेटा, बूथवार मतदाता सूची और ग्राम पंचायत स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर पहले ओबीसी वर्ग की पहचान की जाएगी, उसके बाद घर-घर जाकर सर्वे होगा। आवश्यकता पड़ने पर सभी घरों को भी कवर किया जा सकता है। ओबीसी आयोग का दावा है कि सर्वे शुरू होने के बाद इसे दो माह में पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए पहले मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे और फिर बीएलओ व अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारा जाएगा।
सर्वे में ये पूछे जाएंगे सवाल
परिवार में कुल सदस्य, मुखिया का नाम, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, पॉलिटिकल, कृषि भूमि, बीपीएल, खाद्य सुरक्षा के लाभार्थी सहित अन्य सवाल पूछे जाएंगे। जनाधार के आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में ओबीसी आबादी करीब 44 और ग्रामीण क्षेत्र में 48 फीसदी तक हो सकती है।
‘प्लान-बी’ भी कर रहे तैयार
इसी बीच आयोग ‘प्लान-बी’ पर भी विचार कर रहा है। पहले 400 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के आंकड़े न तो जनाधार से मिले और न ही पंचायत राज विभाग से उपलब्ध कराए गए, जिसके चलते आरक्षण तय करना संभव नहीं हो पाया। अब यदि हाईकोर्ट से पर्याप्त समय नहीं मिलता है, तो इन्हीं पंचायतों के आंकड़े जुटाकर सीमित दायरे में आरक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के विकल्प पर भी मंथन किया जा रहा है।
चुनाव आयोग को मिल चुका अवमानना नोटिस
गौरतलब है कि हाईकोर्ट पहले ही 15 अप्रेल तक पंचायत-निकाय चुनाव कराने का निर्देश दे चुका है। निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर राज्य निर्वाचन आयोग को अवमानना नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इस बीच सरकार ओबीसी आयोग का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ा चुकी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि सर्वे के जरिए ठोस आंकड़े जुटाने पर जोर रहेगा।
एसआइआर के चलते अटका था सर्वे
दरअसल, ओबीसी आरक्षण के लिए सटीक आंकड़े जुटाने की तैयारी पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन एसआइआर प्रक्रिया शुरू होने के कारण चुनाव आयोग ने बीएलओ को इसमें लगाने से मना कर दिया था। इसके चलते सर्वे टल गया। बाद में जनाधार के आंकड़ों के आधार पर काम शुरू हुआ, लेकिन अधूरे डाटा के कारण आरक्षण तय नहीं हो सका।