Rajsamand Lake Beautification Issue: कभी अपनी भव्यता और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए मशहूर राजसमंद झील आज व्यवस्थाओं की अनदेखी और अधूरे प्रयासों की कहानी बयां कर रही है। झील को पर्यटन का आकर्षक केंद्र बनाने के लिए किए गए प्रयास अब सवालों के घेरे में हैं। हाल ही में नगर परिषद ने झील के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 10 लाख रुपए की लागत से दो फ्लोटिंग फाउंटेन लगाए।
एक नौ-चौकी पाल और दूसरा द्वारकाधीश मंदिर के पास स्थापित किया गया। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इसमें एक फाउंटेन तो क्षतिग्रस्त होकर पानी में ही समा गया, जबिक दूसरे को रस्सियों के सहारे बांधकर छोड़ दिया है। इतना ही नहीं, अभी तक इनका अभी तक कनेक्शन भी नहीं हो पाया है। अब सवाल उठ रहे हैं यह महज लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार की बू? अधिकारियों का कहना है कि फव्वारे झील में उतारते समय ठेकेदार द्वारा क्षतिग्रस्त हो गए, जिन्हें अब वही ठीक करवाएगा। लेकिन जनता के मन में यह शंका भी गहराने लगी है कि कहीं इसका खर्च नगर परिषद के खाते से तो नहीं जाएगा?
पहले भी डूब चुके हैं 34 लाख रुपए
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2018 में नगर परिषद ने करीब 34 लाख रुपए खर्च कर नौ-चौकी और इरिगेशन पाल पर फ्लोटिंग फव्वारे लगाए थे। रंग-बिरंगी रोशनी और 60-70 फीट तक पानी उछालते ये फव्वारे लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गए थे। दूर-दूर से लोग इन्हें देखने आते थे। लेकिन कुछ समय बाद ही रखरखाव के अभाव और टेंडर रिन्यू नहीं होने के कारण ये फव्वारे बंद हो गए। आज हाल यह है कि एक फव्वारे का ढांचा ही नजर आता है, जबकि दूसरा पूरी तरह गायब हो चुका है। लाखों रुपए की यह परियोजना अब कबाड़ में तब्दील हो चुकी है।
रोमांच से वीरानी तक का सफर
एक समय था जब इन फव्वारों से उठती पानी की ऊंची धाराएं और रंगीन रोशनी लोगों को रोमांचित कर देती थीं। हवा के साथ उड़ती पानी की बूंदें पाल पर खड़े लोगों को तरोताजा कर देती थीं। लेकिन अब वही जगह वीरानी और उपेक्षा का प्रतीक बन चुकी है।
अधिकारियों का दावा
नगर परिषद के सहायक अभियंता नंदलाल का कहना है कि हाल ही में लगाया फव्वारा झील में उतारते समय क्षतिग्रस्त हो गया था। ठेकेदार इन्हें जल्द ठीक कर पुनः स्थापित करेगा। अब देखना यह है कि राजसमंद झील में सौंदर्यीकरण के ये प्रयास कब तक सिर्फ कागजों और अधूरे वादों तक सीमित रहते हैं, या फिर वास्तव में झील की खूबसूरती को नया जीवन मिल पाता है।