पहले औपचारिकता, अब सख्त कार्रवाई: नकली खाद-बीज पर सरकार का कड़ा रुख

नागौर. प्रदेश में नकली और अमानक खाद, बीज व कीटनाशकों के खिलाफ अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि ठोस एक्शन देखने को मिल रहा है। पिछले 34 महीनों के आंकड़े बताते हैं कि जहां पहले कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती थी, वहीं अब एफआईआर दर्ज करने से लेकर गिरफ्तारी, लाइसेंस निरस्ती और जब्ती तक की कार्रवाई में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।

विधानसभा में विधायक हरीश चौधरी की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने खुलासा किया कि वर्ष 2023 से जनवरी 2026 तक कुल 2220 नमूने अमानक पाए गए। इनमें वर्ष 2023-24 में 666, वर्ष 2024-25 में 683 और वर्ष 2025-26 (जनवरी तक) में 871 नमूने शामिल हैं। आंकड़ों से साफ है कि अमानक नमूनों की संख्या में बहुत बड़ा अंतर नहीं आया, लेकिन कार्रवाई के स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

पिछले 34 महीनों में अमानक पाए गए नमूने

वर्ष 2023-24

आदान का नाम – अमानक नमूनों की संख्या

उर्वरक — 389

बीज — 190

कीटनाशक — 87

कुल – 666

वर्ष 2024-25

आदान का नाम – अमानक नमूनों की संख्या

उर्वरक — 392

बीज — 190

कीटनाशक — 101

कुल – 683

वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक)

आदान का नाम – अमानक नमूनों की संख्या

उर्वरक — 556

बीज — 187

कीटनाशक — 128

कुल — 871

कार्रवाई में बड़ा उछाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में केवल 2 एफआईआर दर्ज हुईं, 1 गिरफ्तारी हुई और 1 चालान पेश किया गया। वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढकऱ 8 एफआईआर और 3 गिरफ्तारियों तक पहुंची। लेकिन वर्ष 2025-26 में स्थिति पूरी तरह बदल गई, जहां जनवरी तक ही 107 एफआईआर दर्ज कर 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 25 मामलों में चालान पेश किए गए। इसी तरह लाइसेंस निरस्ती, निलंबन और जब्ती की कार्रवाई में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2023-24 में जहां केवल 4 लाइसेंस निरस्त और 2 जब्ती की कार्रवाई हुई, वहीं वर्ष 2025-26 में 28 लाइसेंस निरस्त, 169 लाइसेंस निलंबित और 115 जब्ती की कार्रवाई की गई। कुल मिलाकर तीन वर्षों में 117 एफआईआर, 33 गिरफ्तारियां, 39 लाइसेंस निरस्ती और 128 जब्ती की कार्रवाई हुई। यानी इस वित्तीय वर्ष के 10 महीनों में कुल कार्रवाई की 91 प्रतिशत कार्रवाई हुई।

466 मामलों में न्यायालय में वाद दायर

कृषि विभाग के उप शासन सचिव नवरत्न कोली ने बताया कि अमानक पाए गए 2220 नमूनों में से 466 मामलों में न्यायालय में वाद दायर किए जा चुके हैं। इन मामलों में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985, बीज अधिनियम 1966, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 तथा कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

गुण नियंत्रण अभियान से बढ़ी सख्ती

कृषि विभाग के अनुसार किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए व्यापक गुण नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत निरीक्षक लगातार निर्माण इकाइयों और विक्रेताओं का निरीक्षण कर नमूने लेते हैं, जिन्हें राज्य की प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाता है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ जुर्माना, एफआईआर, विक्रय पर रोक, लाइसेंस निरस्ती और निलंबन जैसी कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने फसल सीजन से पहले विशेष अभियान चलाकर निगरानी को और मजबूत किया है।

जांच क्षमता में 29 प्रतिशत बढ़ोतरी

सरकार ने प्रयोगशाला जांच क्षमता भी बढ़ाई है। वर्ष 2024-25 में जहां 59 हजार नमूनों की जांच क्षमता थी, उसे वर्ष 2025-26 में बढ़ाकर 76,250 कर दिया गया है, जो करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि है।

किसानों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्ती से बाजार में नकली और घटिया कृषि आदानों पर लगाम लगेगी, जिससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल सकेगी। लंबे समय से इस क्षेत्र में ढीलापन बना हुआ था, लेकिन अब सख्त कार्रवाई से सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।