Ranthambore tiger conflict: जमीन और क्षेत्र की लड़ाई केवल इंसानों तक सीमित नहीं, वन्यजीवों में भी टेरेटरी के लिए संघर्ष स्वाभाविक है। राजस्थान के सबसे पुराने टाइगर रिजर्व रणथम्भौर नेशनल पार्क में पिछले कुछ वर्षों से बाघों की बढ़ती संख्या के कारण ऐसे टकराव लगातार सामने आ रहे हैं। करीब 1334 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (आरटीआर) में बाघों की आबादी क्षमता से अधिक हो चुकी है।
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) के अनुसार यहां 55 से 60 बाघों के रहने की क्षमता है, जबकि अभी आरटीआर में 75 से अधिक बाघ बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य टाइगर रिजर्व में बाघों की शिङ्क्षफ्टग ही संघर्ष कम करने का प्रभावी उपाय है।
विशेषज्ञों के मुताबिक रणथम्भौर और सरिस्का के बाद बने प्रदेश के अन्य तीन टाइगर रिजर्व अभी भी बाघों के लिए पूरी तरह से अनुकूल नहीं है। मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व से अभी भी कई गांवों को रिलोकेट (पुनर्वास) करना बाकी है। साथ ही यहां पर्याप्त प्रे-बेस (भोजन) का अभाव है। नए टाइगर रिजर्व के जंगलों को बाघों के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है, तभी वहां रणथम्भौर से बाघों की शिफ्टिंग संभव हो सकती है।
मां-बेटी में भी टेरिटरी की जंग
हाल ही में जोन-3 में बाघिन टी-124 (रिद्धि) और उसकी बेटी टी-2504 के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें दोनों घायल हुईं। इससे पहले वर्ष 2015 में बाघिन मछली (टी-16) को उसकी बेटी कृष्णा ने क्षेत्र से खदेड़ा था। बाद में कृष्णा और उसकी बेटी एरोहेड तथा एरोहेड और रिद्धि के बीच भी संघर्ष सामने आए। विशेषज्ञों के अनुसार मादा बाघिन अक्सर अपने जन्म क्षेत्र में ही रहना चाहती है, जिससे मां-बेटी या बहनों के बीच टकराव हो जाता है।
क्यों बढ़ते हैं ऐसे संघर्ष
विशेषज्ञ बताते हैं कि 18 से 24 माह की उम्र में युवा बाघ अपनी अलग टेरेटरी तलाशने लगते हैं। नर बाघ नए इलाकों की तलाश में दूर निकल जाते हैं। लेकिन मादा उसी क्षेत्र में रहना चाहती हैं, जहां उसका बचपन बीता है। ऐसे में पहला झगड़ा दो बहनों में और फिर मां-बेटी के बीच होता है। इनमें जो जीतती है, वह मौजूदा क्षेत्र पर कब्जा जमा लेती है और हारने वाली दूसरी जगह चली जाती है।
आरटीआर की स्थिति
क्षमता: 55-60 बाघ, वर्तमान संख्या: 75
10-30 वर्ग किमी नर बाघ की टेरिटरी
7-10 वर्ग किमी मादा बाघिन की जरूरत
20 फीसदी क्षेत्र पर्यटन के लिए अनुमत
60-70 शिकार की जरूरत हर बाघ को सालाना
30-34 फीसदी हिस्से को विकसित करने की जरूरत
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर और बाधाएं
उत्तरी कॉरिडोर… केला देवी का जंग : बाघों के मूवमेंट में आबादी क्षेत्र की बाधा
दक्षिणी कॉरिडोर: रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व – मुंबई दिल्ली हाईवे
पश्चिमी कॉरिडोर: आबादी, शेरपुर व अन्य गांव, होटल-रिसोर्ट आदि
पूर्वी कॉरिडोर: मध्यप्रदेश में कूनो नेशनल पार्क – मुंबई दिल्ली हाईवे
शिफ्टिंग जारी है…
आरटीआर 1972-73 में बना था, लेकिन तैयार होने में 15- 20 साल लग गए। अन्य प्रोजेक्ट को भी धीमे-धीमे आगे बढ़ाया जा रहा है। रणथम्भौर से इनमें टाइगर्स की शिफ्टिंग भी जारी है। हाल ही में मुकुंदरा में टाइगर भेजा है। जेनेटिक कारणों से अन्य प्रदेशों से भी बाघ लाए जा रहे हैं ताकि जीन पूल सही बना रहे।
केसीए अरुण प्रसाद, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राजस्थान