Nagaur patrika news…राजस्थान में शिक्षा की आधी तस्वीर अधूरी, महिला साक्षरता पुरुषों से 27 अंक पीछे…VIDEO

नागौर. राजस्थान में शिक्षा को लेकर किए गए तमाम दावों के बीच जनगणना 2011 के आंकड़े एक कड़वी हकीकत सामने आई हैं। राज्य की कुल साक्षरता दर 66.11 प्रतिशत दर्ज की गई, लेकिन यह औसत आंकड़ा भीतर छिपी असमानता को उजागर नहीं करता। वास्तविकता यह है कि शिक्षा का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से अभी भी नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषकर महिलाओं की स्थिति आज भी कमजोर ही नजर आती है। जनगणना के अनुसार राजस्थान में पुरुषों की साक्षरता दर 79.19 प्रतिशत रही, जबकि महिलाओं की साक्षरता केवल 52.12 प्रतिशत दर्ज की गई। यानी महिला साक्षरता पुरुषों से लगभग 27 अंक पीछे रही। यह अंतर बताता है कि राज्य की आधी आबादी आज भी शिक्षा से वंचित है।

साक्षरता में लैंगिक खाई बनी सबसे बड़ी चुनौती
आंकड़ों से साफ है कि राजस्थान में शिक्षा की प्रगति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा पुरुष-महिला साक्षरता के बीच की खाई है। जब तक यह अंतर कम नहीं होता, तब तक साक्षरता दर में होने वाला कोई भी सुधार अधूरा ही माना जाएगा। आंकड़े साफ करते हैं कि महिला शिक्षा राज्य की सबसे कमजोर कड़ी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला साक्षरता की स्थिति शहरी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक कमजोर रही है। सामाजिक परंपराएं, घरेलू जिम्मेदारियां और बेटियों की शिक्षा को लेकर उदासीन सोच ने महिला साक्षरता को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। इसका असर सीधे राज्य के समग्र साक्षरता आंकड़ों पर पड़ा है।

योजनाओं के बावजूद नहीं पाटी जा सकी साक्षरता की खाई
राज्य में साक्षरता मिशन और महिला शिक्षा से जुड़ी योजनाएं चलने के बावजूद जनगणना के आंकड़े इनके सीमित असर की ओर इशारा करते हैं। यदि योजनाओं का प्रभाव जमीन पर मजबूत होता, तो महिला साक्षरता और पुरुष साक्षरता के बीच इतना बड़ा अंतर नहीं होता। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य की तस्वीर से अलग नागौर जिले की स्थिति देखने पर यह और अधिक गंभीर नजर आती है। जनगणना 2011 के अनुसार नागौर जिले की कुल साक्षरता दर 62.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यहां पुरुष साक्षरता 77.17 प्रतिशत रही, जबकि महिला साक्षरता केवल 47.82 प्रतिशत पाई गई। यानी जिले में महिला साक्षरता न सिर्फ राज्य औसत से नीचे है, बल्कि 50 प्रतिशत की सीमा भी पार नहीं कर पाई। नागौर में पुरुष-महिला साक्षरता के बीच लगभग 29 अंकों का अंतर यह साफ संकेत देता है कि शिक्षा से राज्य हो या जिला, दोनो में ही औसतन आधी आबादी यानि की महिलाएं व लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं।
अब शिक्षा की बेहतर तस्वीर सामने आएगी
अब जो जनगणना होगी, उसमें निश्चित रूप से महिलाओं एवं लड़कियों के शिक्षा की स्थिति वर्ष 2011 की जनगणना से काफी बेहतर आएगी। इसके लिए जमीनी स्तर पर जागरुक प्रेरकों के साथ मिलकर काम किया गया है। फिलहाल इस क्षेत्र में काफी सुधार आया है। ग्रामीणों के साथ मिलकर भी विभाग ने काम किया है।
अर्जुनराम लोमरोड, जिला साक्षरता अधिकारी नागौर