राजस्थान के दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के ‘मैसेज’ ने हिला डाला, जानें भरतपुर का क्यों दिया उदाहरण?

राजस्थान के मशहूर उद्योगपति और वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने देश की ‘एनर्जी इंडिपेंडेंस’ (ऊर्जा स्वतंत्रता) को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि आज के अस्थिर वैश्विक हालात में भारत का 90% तेल और गैस आयात करना रणनीतिक रूप से जोखिम भरा है। ख़ास बात ये है कि अग्रवाल ने राजस्थान के भरतपुर का जिक्र करते हुए देश के नीति-निर्माताओं को निवेश के माहौल पर आईना दिखाया है।

भरतपुर के घाना अभयारण्य का उदाहरण

अनिल अग्रवाल ने अपने संदेश में भरतपुर के केवलादेव (घाना) पक्षी अभयारण्य का एक मार्मिक उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक समय में यहाँ दुनिया भर से पक्षी आते थे, लेकिन एक शिकारी द्वारा कुछ पक्षियों को मार दिए जाने के बाद पक्षियों ने यहाँ आना बंद कर दिया।

उन्होंने लिखा, “मुझे भरतपुर के घाना बर्ड सेंचुरी की याद आती है, जहां दुनिया भर से पक्षी 5,000 मील उड़कर आते थे। लेकिन 10-15 साल पहले किसी शिकारी ने कुछ पक्षियों को गोली मार दी। इसके बाद पक्षी आना बंद हो गए। अब अनुकूल वातावरण बनाने में सालों लग रहे हैं।”

सन्देश साफ़ था, कि निवेश का माहौल भी पक्षियों जैसा होता है। अगर एक भी अदालती मामला या नोटिस सार्वजनिक होता है, तो पूरी दुनिया में डर फैल जाता है। अनुकूल माहौल बनाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन उसे बिगाड़ने के लिए एक छोटी सी घटना काफी है।

घाना बर्ड सेंचुरी: एक वैश्विक पक्षी स्वर्ग की कहानी

गौरतलब है कि राजस्थान के भरतपुर में स्थित केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्यों में से एक रहा है। यह UNESCO World Heritage Site है और सर्दियों में साइबेरिया, मध्य एशिया, यूरोप और अफ्रीका से लाखों प्रवासी पक्षी यहां आते थे।

एक समय इसे “Birds’ Paradise of the World” कहा जाता था। लेकिन 1990 और 2000 के दशक में अवैध शिकार, जल संकट और मानवीय हस्तक्षेप के कारण पक्षियों की संख्या में भारी गिरावट आई।

In today’s turbulent geopolitics, it is critically important for every large nation to secure energy independence. India is vulnerable because we import 90% of our oil and gas. We are surrounded by sea on three sides which can be blockaded in hostile times. There is no option but…

— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) February 9, 2026

भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का केंद्र

अग्रवाल ने विश्वास जताया कि हमारे पास 300 बिलियन बैरल तेल के बराबर संसाधन मौजूद हैं, जो गयाना (Guyana) की क्षमता से 30 गुना अधिक है।

लागत में कमी: अग्रवाल के अनुसार, भारत आयात की तुलना में आधी कीमत पर घरेलू तेल का उत्पादन कर सकता है।

अर्थव्यवस्था में योगदान: Cairn ने अब तक 1.3 बिलियन बैरल तेल का उत्पादन किया है और सरकारी खजाने में 40 बिलियन डॉलर (लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये) का योगदान दिया है।

युवाओं के लिए ‘5 करोड़’ का नया स्टार्टअप मॉडल

अनिल अग्रवाल ने युवाओं और छोटे उद्यमियों को तेल अन्वेषण (Exploration) के क्षेत्र में आने का आह्वान किया।

उन्होंने सुझाव दिया कि छोटे उद्यमी महज 5 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ड्रिलिंग रिग्स (Rigs) लीज पर लेकर इस क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं।

उन्होंने अमेरिका का उदाहरण दिया जहाँ लोगों ने अपने घरों के पिछवाड़े और खेतों में तेल खोजा और देश को आत्मनिर्भर बनाया।

“दुनिया नहीं चाहती कि भारत उत्पादक बने”

अग्रवाल ने एक कड़वा सच साझा करते हुए कहा कि विकसित देश चाहते हैं कि भारत हमेशा एक ‘मार्केट’ बना रहे ताकि वे अपना सामान हमें बेच सकें। उन्होंने कहा कि भारत को इसके खिलाफ ‘पुश बैक’ करना होगा।

विजन: वेदांता का लक्ष्य अपने उत्पादन को 5 गुना बढ़ाना है, जबकि भारत को अपनी जरूरतों के लिए इसे 10 गुना बढ़ाना होगा।

“रेगुलेशन नहीं, सहूलियत चाहिए”

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में आज महज 200 सक्रिय लाइसेंस हैं, जबकि यहाँ 2,000 होने चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि भारी नियमन (Heavy Regulation) के बजाय ‘सहूलियत’ (Facilitation) प्रदान की जाए ताकि ‘विकसित भारत’ का सपना मरुधरा की धरती से साकार हो सके।