Wellbeing Center : राजस्थान में अब मेडिकल के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर मेडिकल काॅलेज में एक वेलबीइंग सेंटर एवं राज्य स्तर पर वेलनेस सेल की स्थापना की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक में इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं और मानसिक संबल के लिए प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में सुधार के निर्देश दिए।
मेंटल वेलबीइंग डीन की होगी नियुक्ति
राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने कहा कि छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक समर्पित वेलबीइंग सेंटर और राज्य स्तर पर एक वेलनेस सेल की स्थापना तुरंत की जाए। साथ ही, प्रत्येक संस्थान में एक डीन (मेंटल वेलबीइंग) की नियुक्ति की जाएगी, जो विशेष रूप से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की निगरानी करेंगे। छात्रों और फैकल्टी के लिए नियमित ओरिएंटेशन प्रोग्राम अनिवार्य होंगे, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जा सके।
समस्या समाधान के लिए स्टूडेंट एप विकसित की जाएगी
मेडिकल विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए आयुक्त नरेश गोयल ने सभी मेडिकल कॉलेजों और हॉस्टल में सुरक्षात्मक उपायों को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। इसके अंतर्गत छतों की बैरिकेडिंग सुनिश्चित करने के साथ-साथ संपूर्ण कैंपस में प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा। छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ग्रिवांस रिडरेसल सिस्टम के तहत एक स्टूडेंट एप विकसित की जाएगी। साथ ही, शैक्षणिक संसाधनों को आधुनिक बनाने के लिए ई-लाइब्रेरी के विस्तार और सुधार पर जोर दिया जाएगा।
सहायता समूह किए जाएंगे विकसित
मानसिक संबल के लिए कॉलेजों में सहकर्मी सहायता समूह विकसित करने, करियर काउंसलिंग करने और साथ ही, पूर्व छात्रों के अनुभव का लाभ भी दिलाया जाएगा। कैंपस जीवन को तनावमुक्त बनाने के लिए आयुक्त ने अनिवार्य योग सत्र, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने पर विशेष बल दिया। संकट की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन का पूरे कैंपस में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए।
24 घंटे कैंटीन सुविधा
बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए हॉस्टल में बेहतर वातावरण सुनिश्चित करने और ड्यूटी डॉक्टरों के लिए 24 घंटे कैंटीन सुविधा शुरू करने के भी निर्देश दिए गए। साथ ही, कार्यभार को तर्कसंगत बनाने के निर्देश दिए गए। इन कार्यों में सहयोग के लिए एनजीओ एवं प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।