कैंसर मरीजों का मर्ज बढ़ा रही रेफरेंस व्यवस्था, इलाज में देरी से बढ़ रही मुश्किलें

विशेषज्ञ बोेले, रोजाना आठ से दस हो रहे रेफरेंस, मरीज व परिजन परेशान

एक ओर सरकार आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है। वहीं दूसरी ओर अस्पतालों की अंदरूनी व्यवस्थाएं गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों की परेशानी बढ़ा रही हैं। इसका उदाहरण इन दिनों प्रतापनगर स्थित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में देखा जा रहा है। जहां भर्ती गंभीर कैंसर मरीजों को रेफरेंस के लिए घंटों से लेकर कई बार एक-दो दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि कई मरीजों को एसएमएस अस्पताल के चक्कर भी लगाने पड़ रहे हैं, जिससे इलाज में देरी हो रही है और रोग की गंभीरता बढ़ने का खतरा बना रहता है। जिम्मेदार बढ़ती मरीजों की परेशानियों से अनजान बने हुए हैं।

मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा

दरअसल, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी होते हैं, जिन्हें कैंसर के साथ-साथ किडनी, हार्ट और लिवर से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियां भी होती हैं। इन मरीजों के इलाज के लिए स्टेट कैंसर इंस्टीटयूट से एसएमएस अस्पताल या सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रेफरेंस भेजा जाता है, ताकि संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज को देखकर उपचार तय कर सकें। इस दौरान उन्हें भारी परेशानी से जूझना पड रहा है। क्योंकि वहां चक्कर लगाने पडते हैं। ऐसे में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में रेफरेंस से जुड़े डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता न होना और देरी से पहुंचना सबसे बड़ी समस्या बन गई है। इस देरी के चलते कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी जैसी अहम प्रक्रियाएं टल जाती हैं, जिससे मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर जैसी बीमारी में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। कुछ घंटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।

मरीजों के परिजन बोले, जवाबदेही का अभाव

मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि रेफरेंस प्रक्रिया में स्पष्ट दिशा-निर्देश और जवाबदेही का अभाव है। कई बार उन्हें वार्ड से वार्ड और काउंटर से काउंटर तक भटकना पड़ता है। इससे मानसिक तनाव के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों के लिए यह परेशानी और भी गंभीर हो जाती है।

एसएमएस के 60 नंबर कक्ष में भी आधी-अधूरी व्यवस्था

इधर, मरीजों को एसएमएस में रेफरेंस के लिए भटकना नही पडे। इसके लिए धनवंतरि के 60 नंबर कमरे में दोपहर में दो घंटे रेफरेस होता है, लेकिन वहां पर भी आधी अधूरी ही व्यवस्था है। कुछ ही विभागों के रेफरेंस हेा पाते हैं। ये जिम्मा भी रेजिडेंट ही संभाल रहे हैं। यहां भी मरीज व उनके परिजन चक्कर लगाते नजर आते हैं। जिन विभागों के डॉक्टर यहां नहीं मिलते हैं, वो भटकते रहते हैं।

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वर्जन

रेफरेंस को लेकर कभी-कभार दिक्कत आती है। इमरजेंसी में फोन पर या आरयूएचएस से रेफरेंस करवा लेते हैं। व्यवस्था सुधारने के प्रयास जारी हैं, मरीजों को परेशान नहीं होने देंगे।

-डॉ. संदीप जसूजा, अधीक्षक, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट