Fake Ghee: एक साल में बाजार में खपा दिया 1 लाख लीटर नकली घी, फैक्ट्री संचालक का चौंकाने वाला खुलासा

जोधपुर। मण्डोर थानान्तर्गत आंगणवा के नंदपुरी योजना स्थित फैक्ट्री से नकली व मिलावटी घी बनाने का कारखाना पकड़े जाने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सस्ते घी में पाम ऑयल मिलाकर ब्रांडेड घी के लेबल चिपकाकर सस्ते दामों पर गांवों में नकली व मिलावटी घी सप्लाई किया जा रहा था। आरोपी पिछले एक साल से यह कृत्य कर रहा था। अनुमान के अनुसार वह इस दौरान एक लाख लीटर से अधिक नकली व मिलावटी घी बाजार में सप्लाई कर चुका है। उसके साथ एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।

घी की सुगंध व रंग लाने के लिए एसेंस मिलाते

आरोपी नवीन कुमार जैन से जांच व पूछताछ में सामने आया कि वह जोधपुर से सस्ते दामों पर पाम ऑयल खरीदता था और उत्तर प्रदेश से सस्ता घी मंगवाता था। कारखाने में इस घी में पाम ऑयल मिलाया जाता था। देसी घी की सुगंध और रंग लाने के लिए एसेंस डाला जाता था, जिससे मिलावटी घी शुद्ध घी जैसा नजर आने लगता था। इसके बाद 15-15 लीटर के टिन में पैक कर विभिन्न ब्रांडों के लेबल चिपका दिए जाते थे। आरोपी छोटी-छोटी पैकिंग में भी घी बेचता था। उसने रोजाना करीब 300 लीटर नकली व मिलावटी घी बनाना कबूल किया है। इस तरह वह साल भर में एक लाख लीटर से अधिक नकली घी बेच चुका है।

न दूध मिला और न ही दही व मलाई

सीएसटी प्रभारी एसआई मेहराज तंवर के नेतृत्व में पुलिस ने कारखाने पर छापा मारा था। मौके से भारी मात्रा में घी से भरे टिन और बड़ी संख्या में पैकिंग सामग्री जब्त की गई। मूलत: बालेसर दुर्गावता निवासी तथा हाल भदवासिया 80 फुट रोड निवासी नवीन कुमार पुत्र महावीर चन्द्र जैन को गिरफ्तार किया गया। आरोपी व उसके सहयोगी ने घी के नकली या मिलावटी न होने का दावा किया था, लेकिन घी बनाने में काम आने वाला न तो दूध, न दही और न ही दूध की मलाई मौके पर मिली। सख्त पूछताछ में नवीन ने पाम ऑयल के मिश्रण से घी बनाना कबूल किया।

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एक गोदाम सालभर से है सील

आरोपी नवीन कुमार पिछले एक साल से नकली व मिलावटी घी बनाने में लिप्त है। पुलिस मुख्यालय की एक टीम ने करीब एक साल पहले माता का थान क्षेत्र में उसके गोदाम पर छापा मारा था, जिसे सील किया गया था और वह अब तक सील है। आरोपी आसपास के गांवों में अधिकांश नकली व मिलावटी घी की सप्लाई कर रहा था। सस्ते दामों पर देसी घी मिलने के लालच में ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा था।