जयपुर के पास बसेगी राजस्थान की अपनी ‘सिलिकॉन वैली’, विशाखापत्तनम और तेलंगाना के मॉडल पर होगी हाईटेक सिटी तैयार

Jaipur Hi-Tech City : राजस्थान की राजधानी अब केवल अपनी विरासत और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक ‘टेक पावरहाउस’ के रूप में भी पहचानी जाएगी। प्रदेश की भजनलाल सरकार जयपुर के पास एक ऐसी अत्याधुनिक हाईटेक सिटी (Hi-Tech City) विकसित करने की तैयारी में है, जो विशाखापत्तनम की ‘क्वांटम सिटी’ और तेलंगाना के ‘आईटी हब’ को टक्कर देगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य जयपुर पर बढ़ते शहरी दबाव को कम करना और स्थानीय युवाओं को विश्वस्तरीय रोजगार के अवसर प्रदान करना है।

पुराने ढर्रे से हटकर ‘फ्यूचरिस्टिक’ प्लानिंग पर जोर

हाल ही में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि अब शहरी विकास पुराने ढर्रे पर नहीं होगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि भविष्य की जरूरतों, बढ़ती आबादी और आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए ही नई कॉलोनियों और सड़कों का खाका तैयार किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को विशाखापत्तनम और तेलंगाना के सफल मॉडल्स का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं ताकि जयपुर की इस नई सिटी में तकनीक और सुविधाओं का अनूठा संगम देखने को मिले।

क्या होगा इस हाईटेक सिटी में खास?

जयपुर के पास प्रस्तावित यह शहर केवल इमारतों का जंगल नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र होगा। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार होंगी:

AI और क्वांटम हब: यहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित इंफ्रास्ट्रक्चर होगा।

एकीकृत कैंपस: वर्क-लाइफ बैलेंस को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग, रिसर्च और वर्कप्लेस एक ही परिसर में उपलब्ध होंगे।

स्टार्टअप्स को पंख: नए स्टार्टअप्स के लिए रियायती दरों पर जमीन और प्लग-एंड-प्ले जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी।

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट: शहर को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि देश-विदेश की दिग्गज आईटी कंपनियां यहाँ निवेश करने के लिए आकर्षित हों।

इको-फ्रेंडली एनवायरनमेंट: पूरी तरह डिजिटल सेवाओं के कारण यह क्षेत्र प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल होगा।
2027 तक पूरे होंगे सभी बड़े प्रोजेक्ट्स
मुख्य सचिव ने केवल नई सिटी ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर में चल रहे विकास कार्यों की रफ्तार पर भी जोर दिया है। उन्होंने नगरीय विकास विभाग को निर्देश दिए कि राज्य में संचालित 143 मेजर हाई-कॉस्ट प्रोजेक्ट्स को हर हाल में दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि बजट घोषणाओं का लाभ आम जनता तक समयबद्ध तरीके से पहुंचे। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि गुणवत्ता और समय सीमा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस हाईटेक सिटी के बनने से राजस्थान के युवाओं को पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश में बेंगलुरु, हैदराबाद या पुणे जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यह शहर न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा, बल्कि ‘विकसित राजस्थान’ के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।