आंगनबाड़ी केन्द्र, जहां तीन से छह साल तक के नौनिहालों को पढ़ाने के साथ स्वास्थ्य का ख्याल रखना है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति विभाग सजग नहीं है। केद्रों पर यूरिनल व शौचालय तक का अभाव है। सर्दी में वहां आने वाले बच्चों को ठिठुरते हुए नालियों या सड़क पर यूरीन करने आना पड़ता है। कई जगह पक्की सड़क होने व नालियां गंदी होने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता। ये हालात सामने आए। जब पत्रिका टीम ने केंद्रों पर पहुंची। उन हालात को बयां करती एक रिपोर्ट।
बापू नगर नदी के पास
यहां आंगनबाड़ी केन्द्र पतरों की छत का है। उसके आगे पत्थर व कंकड़ पड़े हैं। जो केंद्र पर पहुंचे वालों के बच्चों के पैरों में चुभते है। यहां यूरिनल व शौचालय का अभाव है। यहां मौजूद महिला ने कैमरा शुरू करने से पहले बताया कि बच्चे बाहर खुले में यूरिनल के लिए जाते है। इसके बाद बोली पास के स्कूल में जाते है।
पूरा भवन ही जर्जर
इन्द्रा कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे भवन में चल रहा है, जो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। भवन में यूरिनल व शौचालय तो दूर की बात है वहां बैठना भी खतरे से खाली नहीं है। भवन के एक तरफ की दीवार पूरी तरह से टूटी हुई है। जो शेष है वह कभी भी भरभराकर गिर सकती है।
मस्तान बाबा क्षेत्र
इस क्षेत्र में बने आंगनबाड़ी केंद्र का भवन तो बेहतर है, लेकिन यहां भी शौचालय व यूरिनल का अभाव है। यूरिनल के नाम पर चबूतरी पर एक दीवार बनी है। उसका भी उपयोग होना नहीं दिखा। बच्चों को तो बाहर ही खुले में यूरिनल के लिए ठिठुरते हुए जाना पड़ता है।
रामलीला मैदान में बाहर बैठे थे बच्चे
यहां दो आंगनबाड़ी केन्द्र है। एक केंद्र पर बच्चे बाहर बैठे थे। वहां बैठे क्षेत्र की महिला बोली शौचालय तो छोड़े पीने को पानी भी आस-पास से लाना पड़ता है। वहीं पतली सी गली में दूसरे केंद्र पर भी यूरिनल व शौचालय नहीं था। वहां भी बच्चे आस-पास ही बाहर जाते है।
महिलाओं ने यह बताई पीड़ा
आंगनबाड़ी केंद्रों पर शौचालय नहीं होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव होने की आशंका को वहां मौजूद आस-पास की महिलाओं ने भी स्वीकार किया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर मौजूद कार्यकर्ता, सहायिका आदि का कहना था कि किराए के महज 750 रुपए मिलते है। इतने रुपए में अच्छा व बेहतर स्थान मिलना मुश्किल है। हर जगह पर कुछ न कुछ कमी मिल जाती है। जो केंद्र घरों के एक कमरे चल रहे है। वहां परिजन भी बच्चों के लिए शौचालय आदि नहीं खोलते है।
शौचालय बनाने के निर्देश दिए है
जिला प्रशासन स्तर पर अलग-अलग विभागों के सभी अधिकारियों से इस बारे में हाल ही में केंद्रों पर शौचालय बनाने के निर्देश दिए है। यूरिनल व शौचालय की अधिक समस्या शहरी क्षेत्र में है। वहां मकान मालिक यह सुविधा देने से इनकार कर देते है।
राजेश कुमार, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, पाली