नागौर. शहर के प्रतापसागर तालाब में भी अब गंदा पानी जाने लगा है। सीवरेज के साथ ही सडक़ों एवं इधर, उधर से होते हुए एकत्रित होकर पूरा पानी किनारों से होते हुए सीधा प्रतापसागर तालाब में पहुंचता है। कई बार तो इसमें सीवर में जाने वाला भी मिला रहता है। इसके चलते तालाब में पानी तो भरा है, लेकिन यह गंदा मटमैला होने के साथ दुर्गन्धयुक्त भी है। इसकी वजह से यह पानी पीने योग्य भी नहीं रहा। इसकी गंदगी के कारण तालाब का सौन्दर्य बदरंग होने के साथ ही भूजल के भी प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
प्रतापसागर तालाब की विरासत अब खतरें में नजर आने लगी है। तालाब एवं इससे सटे पार्क में सौन्दर्यीकरण के लिए करोड़ों की राशि व्यय की जा चुकी है। भारी-भरकम राशि व्यय होने के बाद इस तालाब का रखरखाव करने में लापरवाही बरती जा रही है। स्थानीय बाशिंदों की माने तो तालाब में सडक़ों के रास्ते होते हुए गंदा पानी तालाब में पहुंच रहा है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। स्थिति यह हो गई है कि तालाब के किनारे खड़े होकर कोई टहल नहीं सकता है। पास जाने पर दुर्गन्ध का तेज भभका आने पर लोगों का मन खराब हो जाता है।
तालाब को बना दिया गंदा नाला
तालाब को देखने पर एक सिरे इसके पूरे पानी गंदगी ऊपर ही सामने नजर आने लगती है। इसके किनारों पर गंदगी के साथ ही कंटीली झाडिय़ां भी तालाब में मिल जाती है। इसके पानी की ऊपरी पर्त पर गंदगी की एक मोटी चादर भी जम गई है। इसमें कई जगहों पर उगी घास के साथ कंटीली झाडिय़ां ही बता देती हैं कि इस तालाब का रखरखाव कैसे किया जा रहा है।
तालाब में पांच जगहों से गिर रहा गंदा पानी
प्रतापसागर तालाब के पास ही सीवरेज कनेक्शन है। यहां से सीधा लाखों लीटर पानी तालाब में गिर रहा है। इसकी वजह से यह पूरा तालाब नाले के गंदे पानी से भर चुका है। गुरुवार को तालाब के स्थिति पड़ताल की गई तो गंदगी के दृश्य सामने नजर आए। इसके चारों ओर हरी काई के साथ ही गंदगी उतराती नजर आई। बताते हैं कि स्थानीय लोगों के अनुसार पहले तालाब पहली ही बारिश में आधा से ज्यादा भर जाता था। दूसरी बारिश में तालाब पूरा भरा हुआ नजर आता था। आसपास के क्षेत्रों से सैंकड़ों की संख्या में न केवल लोग यहां पानी के लिए पहुंचते थे, बल्कि इस तालाब का पानी पशुओं के लिए भी संजीवनी का काम करता था। अब तालाब की हालत यह हो गई है कि पहले की अपेक्षा न केवल काफी सिकुड़ गया है, बल्कि इसका पानी वर्तमान में हाथ में भी नहीं लिया जा सकता है। देखने पर ही यह गंदे नाले का तालाब नजर आने लगा है।
तालाब का पानी बना दिया जहरीला
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि प्रदूषित पानी वह पानी है जिसकी संरचना इस हद तक बदल गई है कि वह अनुपयोगी है। दूसरे शब्दों में, यह जहरीला पानी है जिसे पिया नहीं जा सकता या कृषि जैसे आवश्यक उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। मुख्य जल प्रदूषकों में बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी, उर्वरक, कीटनाशक, दवा उत्पाद, नाइट्रेट, फॉस्फेट, प्लास्टिक , मल अपशिष्ट और यहां तक कि रेडियोधर्मी पदार्थ शामिल हैं। ये पदार्थ हमेशा पानी का रंग नहीं बदलते हैं, जिसका अर्थ है कि ये अक्सर अदृश्य प्रदूषक होते हैं।
इनका कहना है…
प्रतापसागर तालाब में गंदा पानी जा रहा है तो इसे देखवा लिया जाएगा। हालांकि पानी तो सीवरेज सिस्टम में ही जाता है, लेकिन फिर भी ऐसा है तो इसे देखवा लिया जाएगा।
रामरतन चौधरी, आयुक्त नगरपरिषद नागौर