Cyber Fraud Rajasthan: राजस्थान तेजी से देश में साइबर ठगों का नया गढ़ बनता जा रहा है। हाल ही में सामने आए आंकड़े सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद चिंताजनक हैं। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) में ही राज्य में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करीब 2 अरब 46 करोड़ रुपए की ठगी दर्ज की जा चुकी है।
हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी से इसमें से 64.75 करोड़ रुपए होल्ड (फ्रीज) कराए गए और 1.75 करोड़ रुपए पीड़ितों को वापस भी दिलाए गए हैं।
साइबर ठगी के हॉट-स्पॉट में राजस्थान के 4 जिले शामिल
देशभर के टॉप-20 साइबर ठगी के हॉट स्पॉट (प्रमुख केंद्रों) की सूची में राजस्थान के चार जिले शामिल हो चुके हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कभी साइबर अपराध के लिए सबसे ज्यादा बदनाम झारखंड का ‘जामताड़ा’ (13वें स्थान पर) और राजस्थान का ‘डीग’ (16वें स्थान पर) अब पीछे छूट गए हैं।
अलवर साइबर ठगी का नया गढ़
इनकी जगह अब अलवर छठे स्थान पर आकर साइबर ठगी का नया बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। देश में इस मामले में हरियाणा का ‘नूंह’ अभी भी पहले स्थान पर बना हुआ है, जिसके बाद बेंगलूरु और बिहार आते हैं।
सीमावर्ती इलाकों तक फैला नेटवर्क
चिंता की बात यह है कि साइबर ठगों का यह जाल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी और पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों तक फैल गया है।
इन बॉर्डर वाले क्षेत्रों में इंटरनेट का इस्तेमाल कर ठगी के नए ठिकाने बनाए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन जगहों से देशभर के लोगों को फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाना, निवेश के नाम पर धोखा देना और बैंकिंग फ्रॉड जैसी वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है।
क्या मानना है विशेषज्ञों का
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध अब सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े संगठित अपराध का रूप ले चुका है। राजस्थान में तेजी से फैलते ये साइबर हॉट-स्पॉट आने वाले समय में कानून-व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।