राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में स्थित गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर पिछले 45 दिनों से जारी स्थानीय श्रमिकों का महापड़ाव चर्चा में है। जबकि धरना स्थल पर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के पिछले 20 दिनों से खुद डेरा जमाए बैठे रहने के बाद से ये आंदोलन और सुर्ख़ियों में आ गया है। इसी आंदोलन के बीच एमएलए भाटी ने हाल ही में जिला कलेक्ट्रेट पर ‘आत्मदाह’ की खौफनाक व उग्र कोशिश की थी। उसके बाद भी गतिरोध बने रहने के बाद अब उन्होंने देश के गृह मंत्री अमित शाह को खून से पत्र लिखा है। गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह का 25-26 मई को राजस्थान दौरा है, जिसमें वे बीकानेर पहुंचकर कई गतिविधियों में शामिल होंगे।
शाह दौरे से ठीक पहले ‘ब्लड प्रोटेस्ट’!
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी
देश के गृह मंत्री अमित शाह 25 और 26 मई को राजस्थान के बीकानेर संभाग के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे को लेकर जहां भाजपा संगठन स्वागत की तैयारियों में जुटा है, वहीं बाड़मेर के धरना स्थल पर बैठे शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और मजदूरों ने एक ऐसा अनूठा प्रदर्शन कर डाला जिसने पूरी लाइमलाइट अपनी तरफ खींच ली।
अपने ही खून से लिखी व्यथा : रविवार को धरना स्थल पर मजदूरों ने सुइयों के जरिए अपने शरीर से खून निकाला और कागजों पर अमित शाह के नाम अपनी व्यथा लिख डाली।
दिल्ली तक गूंजेगी आवाज!: भाटी जानते हैं कि राजस्थान का स्थानीय प्रशासनिक अमला और स्थानीय भाजपा नेता इस मामले को जयपुर स्तर पर दबाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि अमित शाह के दौरे का फायदा उठाकर इस मुद्दे को सीधे देश के सबसे ताकतवर गृह मंत्री के टेबल तक पहुंचा दिया गया है।
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी
जानें भाटी की 4 बड़ी मांगें
विधायक रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व में आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल अपनी जिन प्रमुख मांगों को लेकर अड़ा हुआ है, वे सीधे तौर पर श्रम कानूनों और स्थानीय अधिकारों से जुड़ी हैं।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें (Demands)ठेकेदार कंपनी का तर्क (Company Stand)रविंद्र सिंह भाटी और श्रमिक प्रतिनिधियों का पलटवारस्थानीय मजदूरों और ड्राइवरों की बहालीश्रमिकों को निकाला नहीं गया है, नया टेंडर आने के बाद वे खुद काम छोड़कर धरने पर बैठ गए हैं।नए ठेकेदार ने आते ही पुराने स्थानीय भूमिपुत्रों को नौकरी से हटाकर बाहरी राज्यों के लोगों को रखना शुरू कर दिया।8 घंटे की शिफ्ट की कानूनी गारंटीकंपनी नियमों के मुताबिक ही काम लेती है और कर्मचारियों को उनकी स्किल (Skill) के आधार पर वेतन दे रही है।श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर मजदूरों से जबरन एक्स्ट्रा ड्यूटी कराई जाती है और पूरा ओवरटाइम नहीं मिलता।स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकताअमानक और बिना भारी कमर्शियल लाइसेंस (Heavy License) के वाहन चलाने की अनुचित मांगों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।कंपनी स्थानीय युवाओं को जानबूझकर तकनीकी कमियां निकालकर बाहर कर रही है ताकि कम वेतन में बाहरी लोगों का शोषण किया जा सके।पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू करनाकंपनी किसी भी प्रकार के अनावश्यक और नियम विरुद्ध दबाव में आकर कोई नया समझौता नहीं करेगी।प्रतिनिधिमंडल के सदस्य वीर सिंह थूबली का आरोप है कि प्रशासन की मौजूदगी में समझौता हुआ था, पर ठेकेदार बाद में मुकर गया।
यह गरीब परिवारों के स्वाभिमान की लड़ाई है: रविंद्र सिंह भाटी
कलेक्ट्रेट पर हुए ‘आत्मदाह’ के प्रयास और अब अमित शाह को खून से पत्र लिखे जाने के बाद स्थानीय भाजपा नेता इस पूरे आंदोलन को रविंद्र सिंह भाटी का एक ‘पॉलिटिकल स्टंट’ करार दे रहे हैं। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा का कहना है कि वे कई बार वार्ता के लिए आगे आए, लेकिन आंदोलनकारी पक्ष खुद टेबल पर नहीं आया। इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर विधायक भाटी ने कड़ा ऐतराज जताया है।
रविंद्र सिंह भाटी का तीखा और भावुक बयान: “इस पवित्र और स्वाभिमान की लड़ाई को राजनीति का चश्मा पहनाना पूरी तरह से गलत और उन गरीब मजदूरों का अपमान है जो पिछले 45 दिनों से धूल फांक रहे हैं। इस धरने में हर पार्टी, हर जाति और हर विचारधारा के लोग शामिल हैं। यदि सत्ता में बैठी भाजपा सरकार ने समय रहते इन गरीब श्रमिकों की पुकार सुन ली होती, तो आज बाड़मेर के बेटों को अपने ही खून से देश के गृह मंत्री को पत्र लिखने की नौबत ही क्यों आती? हम आखिरी दम तक इस तानाशाही और ठेकेदार की हठधर्मिता के खिलाफ लड़ेंगे, मजदूर केवल एक दिहाड़ी कामगार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का असली आधार हैं।”
ठेकेदार का तर्क: वाजिब मांगें मानेंगे, दबाव नहीं
श्री मोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रतिनिधि मनोहर सिंह पाबड़ा का कहना है कि कंपनी श्रमिकों की उचित मांगों को मानने के लिए तैयार हैं। लेकिन बिना लाइसेंस वाहन संचालन या नियमों से बाहर की मांगों पर सहमति संभव नहीं है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को उनकी स्किल के अनुसार वेतन दिया जा रहा है और आंदोलन के जरिए अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता जारी है, जल्द समाधान की उम्मीद है। हालांकि, लंबा खिंचता आंदोलन प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शिव उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। आखिर उस कमेटी ने अब तक क्या किया। उसके प्रयास धरातल पर नजर नहीं आ रहे।