Rajasthan Politics: खुद पर पेट्रोल छिड़कने वाले MLA रविंद्र सिंह भाटी के ‘सपोर्ट’ में कांग्रेस! BJP सरकार पर हमलावर

राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों के हक की लड़ाई अब केवल एक स्थानीय श्रमिक आंदोलन नहीं रह गई है, बल्कि इसने मरुधरा की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल ला दिया है। शिव क्षेत्र से बेहद लोकप्रिय और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी द्वारा मंगलवार को बाड़मेर कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़कने की खौफनाक और भावुक घटना के बाद, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे लपक लिया है।

अशोक गहलोत से लेकर गोविंद सिंह डोटासरा तक, कांग्रेस के तमाम बड़े सूरमा इस समय निर्दलीय विधायक और पीड़ित मजदूरों के पीछे ढाल बनकर खड़े हो गए हैं। इस रणनीतिक मूव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है।

कांग्रेस क्यों उतरी ‘सपोर्ट’ में?

कांग्रेस पार्टी का रविंद्र सिंह भाटी के लिए इस तरह खुलकर सामने आना राजस्थान की राजनीति के जानकारों को हैरान कर रहा है। लेकिन इसके पीछे का गणित बहुत सीधा है।

सरकार की घेराबंदी का बड़ा मौका: गिरल गांव में पिछले 40 दिनों से मजदूर धरने पर बैठे हैं और विधायक भाटी पिछले 14 दिनों से उनके साथ थे। कांग्रेस का आरोप है कि इतने लंबे समय तक सरकार और जिला प्रशासन का मौन रहना उनकी घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।

युवा जनभावनाओं को भुनाना: रविंद्र सिंह भाटी की सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर युवाओं के बीच जबरदस्त पकड़ है। उनके इस बेहद भावुक कदम (“मुझे मारो, मेरे मजदूरों को मत मारो”) के बाद जनता में जो सहानुभूति की लहर पैदा हुई है, कांग्रेस उसे सीधे भाजपा विरोधी आक्रोश में बदलना चाहती है।

यह घोर उदासीनता का नतीजा है : EX CM अशोक गहलोत

इस पूरे घटनाक्रम पर सबसे पहला और सबसे तगड़ा हमला पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बोला। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्वीट करते हुए सीधे मुख्यमंत्री और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

गहलोत ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों का 38 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। शिव विधायक श्री रविंद्र सिंह भाटी भी 15 दिन से इन मजदूरों के साथ बैठे हैं परन्तु न तो सरकार ने कोई वार्ता की और न ही प्रशासन ने ध्यान दिया। इस घोर उदासीनता के कारण वे मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट कूच करने एवं अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलने तक को मजबूर हुए। भाजपा के शासन में जब एक विधायक को अपनी मांगों पर ध्यानाकर्षण के लिए ऐसा आत्मघाती कदम उठाना पड़ रहा है, तो आम आदमी की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। राज्य सरकार को अविलंब इनकी मांगों पर ध्यान देकर सकारात्मक हल निकालना चाहिए।”

बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों का 38 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। शिव विधायक श्री @RavindraBhati__ भी 15 दिन से इन मजदूरों के साथ बैठे हैं परन्तु न तो सरकार ने कोई वार्ता की और न ही प्रशासन ने ध्यान दिया। इस उदासीनता के कारण वे मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट कूच करने एवं…

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) May 19, 2026

राजस्थान में लोकतंत्र वेंटिलेटर पर : डोटासरा

राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज में भजनलाल सरकार को ‘पर्ची सरकार’ कहते हुए आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह घटना राजस्थान के इतिहास में एक काला धब्बा है।

डोटासरा ने दो टूक शब्दों में कहा, “एक जनप्रतिनिधि को अपनी और जनता की बात सुनाने के लिए खुद पर पेट्रोल छिड़कना पड़े, इससे शर्मनाक बात राजस्थान के लोकतंत्र के लिए क्या होगी? यह आक्रोश अकेले रविंद्र भाटी का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन लाखों नागरिकों का है जिनकी सुनवाई इस ‘पर्ची सरकार’ में कहीं नहीं हो रही है।”

डोटासरा ने मांग की कि सरकार अपनी कुंभकर्णी नींद से तुरंत जागे और 45 दिन से भूखे-प्यासे बैठे मजदूरों से वार्ता कर मुद्दों का तत्काल समाधान निकाले।

राजस्थान में लोकतंत्र वेंटिलेटर पर है!

एक जनप्रतिनिधि को अपनी और जनता की बात सुनाने के लिए खुद पर पेट्रोल छिड़कना पड़े, इससे शर्मनाक बात राजस्थान के लोकतंत्र के लिए क्या होगी? यह आक्रोश @RavindraBhati__ का अकेले का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन लाखों नागरिकों का है जिनकी सुनवाई इस…

— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) May 20, 2026

डोटासरा ने भाटी को भी दी नसीहत

हालांकि, एक जिम्मेदार राजनेता के तौर पर डोटासरा ने युवाओं के बीच गलत संदेश जाने से रोकने के लिए विधायक रविंद्र भाटी के इस तरीके की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, “एक विधायक को भी इस प्रकार की अत्यधिक भावुकता से बचना चाहिए। विरोध का तरीका हमेशा संवैधानिक होना चाहिए। सार्वजनिक रूप से खुद पर पेट्रोल छिड़कना या आत्मदाह जैसा कदम उठाना कानून और सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है। एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को कानून के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए।”

जूली-खाचरियावास का कड़ा रुख

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना को लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक बताया है। जूली ने कहा कि बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों के हक की लड़ाई में पिछले दो हफ्तों से धरने पर बैठे विधायक को भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण कलेक्ट्रेट में पेट्रोल छिड़कने जैसी कठोर स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों के हक की लड़ाई में पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे शिव विधायक श्री रविन्द्र सिंह भाटी जी को भाजपा सरकार की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण कलेक्ट्रेट कूच करना पड़ा और वहां अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलने जैसे कठोर कदम के लिए मजबूर होना पड़ा,…

— Tika Ram Jully (@TikaRamJullyINC) May 19, 2026

प्रताप सिंह खाचरियावास की खुली चुनौती

मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने तो सीधे शब्दों में सरकार को भुगतने की चेतावनी दे डाली है, “भाजपा की पर्ची सरकार ने एक निर्वाचित विधायक और गरीब मजदूरों का इतना अपमान किया है कि वे कलेक्ट्रेट कूच करने एवं अपने ऊपर पेट्रोल डालने पर मजबूर हो गए। विधायक पद की गरिमा सरकार को ध्यान रखनी चाहिए। अगर विधायक रविंद्र सिंह जी भाटी या किसी भी मजदूर के साथ कुछ भी गलत हुआ, तो भाजपा सरकार इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।”

बाड़मेर में विधायक रविंद्र सिंह जी भाटी मजदूरों के हक के लिए पिछले २ हफ़्ते से धरने पर बैठे है,लेकिन भाजपा की पर्ची सरकार ने विधायक से न कोई वार्ता की न कोई संज्ञान लिया ।

विधायक रविंद्र जी व मजदूरों का इतना अपमान किया भाजपा सरकार ने की कलेक्ट्रेट कूच करने एवं अपने ऊपर पेट्रोल… pic.twitter.com/7yURl4U9Zz

— Pratap Khachariyawas (@PSKhachariyawas) May 19, 2026

इसी तरह वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने भी इसे प्रशासनिक असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर किया गया एक गहरा आघात है।

बाड़मेर के शिव क्षेत्र में मजदूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई को लेकर गिरल लिग्नाइट माइंस में पिछले 38 दिनों से धरना जारी है,लेकिन राजस्थान सरकार अब तक पूरी तरह मौन बनी हुई है।पिछले 15 दिनों से शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी स्वयं मजदूरों के समर्थन में धरने पर बैठे रहे।

यह प्रदेश… pic.twitter.com/cREBtdhH9C

— Dharmendra Singh Rathore (@DharmendraS_inc) May 19, 2026

जिन 5 मुद्दों पर वार्ता रही पूरी तरह फेल

मंगलवार देर रात बाड़मेर जिला कलेक्ट्रेट में प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब 4 घंटे तक लंबी माथापच्ची चली, लेकिन कोई ठोस रास्ता नहीं निकल पाया।

नए टेंडर के बाद कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक स्थानीय ड्राइवरों और श्रमिकों की बिना शर्त तुरंत पुनर्बहाली की जाए।

माइंस के भीतर काम करने वाले सभी कार्मिकों के लिए सख्त रूप से 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू की जाए।

इस पूरी परियोजना और खनन कार्य में स्थानीय बाड़मेर के युवाओं को रोजगार में पहली प्राथमिकता दी जाए।

श्रम विभाग के नियमों के अनुसार सभी मजदूरों को समय पर नियमानुसार वेतन, बोनस और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

खदान के भीतर काम करने के दौरान श्रमिकों के लिए उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का पालन शत-प्रतिशत सुनिश्चित हो।