Jaisalmer War Museum: अब संग्रहालय सिर्फ पुरानी और ऐतिहासिक चीजों को सहेजकर रखने की जगह नहीं रह गए हैं। आज की युवा पीढ़ी के लिए ये अनुभव, राष्ट्र भावना और यादें समेटने का एक बड़ा जरिया बन रहे हैं। ‘विश्व संग्रहालय दिवस’ के मौके पर राजस्थान का जैसलमेर वॉर म्यूजियम इस बदलते दौर का सबसे बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है।
जैसलमेर-जोधपुर हाइवे पर थार के रेगिस्तान के बीच स्थित यह म्यूजियम आज देश का एक प्रमुख ‘इमोशनल टूरिज्म हब’ बन चुका है। आंकड़ों की बात करें, तो हर साल करीब 5 लाख पर्यटक भारतीय सेना के इस गौरवमयी इतिहास को करीब से देखने पहुंच रहे हैं।
क्यों खास है जैसलमेर वॉर म्यूजियम?
इस संग्रहालय की बढ़ती लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसकी जीवंत प्रस्तुति है। यहां सैलानी सिर्फ घूमने या फोटो खिंचाने नहीं आते, बल्कि देश के सैन्य इतिहास को महसूस करने आते हैं।
इतिहास के जीवंत साक्ष्य
यहां 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इस्तेमाल किए गए असली सैन्य उपकरण रखे गए हैं। इनमें दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले शेरमन, विजयंत, टी-55 और पाकिस्तानी सेना से छीने गए टी-59 टैंक शामिल हैं। इसके अलावा वायुसेना का लड़ाकू विमान ‘हंटर’ भी यहां पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
मिनी सिनेमा हॉल
म्यूजियम में बने ऑडियो-विजुअल हॉल में शॉर्ट फिल्में दिखाई जाती हैं, जो भारतीय सैनिकों की बहादुरी और युद्ध के हालातों को पर्दे पर सजीव कर देती हैं। इसे देखकर हर देशवासी की आंखें गर्व से नम हो जाती हैं। परिसर में 15 मीटर ऊंचे पोल पर लहराता विशाल राष्ट्रध्वज यहां आने वाले हर सैलानी में देशभक्ति का जोश भर देता है।
एक्सपर्ट व्यू: तेजी से बढ़ रहा है ‘बॉर्डर टूरिज्म’
पर्यटन विश्लेषक अनिल पंडित के अनुसार, देश के युवाओं में अब ‘बॉर्डर टूरिज्म’ और सेना के प्रति क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। थार की रेत के बीच बना यह म्यूजियम सिर्फ युद्ध की कहानियां नहीं सुनाता, बल्कि यह एक ऐसा मंच बन चुका है जहां आज की नई पीढ़ी किताबों और फिल्मों से बाहर निकलकर देश की मिट्टी और राष्ट्रभावना से सीधे तौर पर जुड़ रही है। अगर आप भी जैसलमेर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो थार के इस वॉर म्यूजियम में जाकर भारतीय सेना के शौर्य को सलाम करना बिल्कुल न भूलें।