CETP Project: जयपुर. राजस्थान सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते जल प्रदूषण की समस्या के समाधान और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार के सहयोग से भिवाड़ी के कहरानी क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित किया जाएगा। इसके लिए राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति ने 75 करोड़ रुपए के अनुदान को मंजूरी प्रदान कर दी है। समिति की बैठक मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित हुई।
प्रस्तावित सीईटीपी परियोजना के तहत कहरानी ग्रीन ट्रीटर्स एसोसिएशन द्वारा 6 एमएलडी क्षमता का आधुनिक प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना से कहरानी, बांदापुर, पाथरेड़ी और चौपंकी औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित 400 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को सीधा लाभ मिलेगा। इन इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप उपचार किया जा सकेगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में जल प्रदूषण की समस्या में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय में औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। कई छोटे और मध्यम उद्योगों के पास स्वयं का ट्रीटमेंट सिस्टम स्थापित करने की पर्याप्त क्षमता नहीं होती, जिसके कारण प्रदूषित जल पर्यावरण के लिए खतरा बन जाता है। ऐसे में सीईटीपी जैसी सामूहिक व्यवस्था उद्योगों को राहत देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जल प्रदूषण से मिलेगी राहत
इस परियोजना से न केवल जल प्रदूषण नियंत्रण को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस सीईटीपी के माध्यम से उद्योगों के संचालन में पारदर्शिता और पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा। इससे निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा और औद्योगिक क्षेत्रों का सतत विकास संभव होगा।
उल्लेखनीय है कि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा हाल ही में राज्य में औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से नई योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत नए सीईटीपी की स्थापना अथवा पुराने प्लांट के अपग्रेडेशन के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिकतम 75 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों को पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में दीर्घकालिक समाधान विकसित करना है।
राज्य सरकार के इस फैसले को औद्योगिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भिवाड़ी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।