अजमेर। नीट पेपर लीक मामले को लेकर बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। किशनगढ़ विधायक डॉ. विकास चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने, पूरी प्रक्रिया की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने और एनटीए को भंग करने की मांग की। डॉ. विकास चौधरी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं का भविष्य खतरे में डाल दिया है।
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लापरवाही ने परीक्षा प्रणाली को मजाक बनाया
उन्होंने कहा कि 22 लाख विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत, मानसिक तनाव और आर्थिक संघर्ष के बाद नीट परीक्षा दी, लेकिन केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की लापरवाही ने परीक्षा प्रणाली को मजाक बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था और जांच एजेंसियों ने गड़बड़ियों की पुष्टि भी की थी, इसके बावजूद सरकार ने विवादित व्यवस्था को जारी रखा। उन्होंने कहा कि एनटीए स्तर पर कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया और संदिग्ध एजेंसियों को भी ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया।
प्रतियोगी परीक्षाएं अब संदेह के घेरे में
पूर्व विधायक रामनारायण गुर्जर ने कहा कि रेलवे, पुलिस, शिक्षा सहित देश की कई बड़ी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाएं अब संदेह के घेरे में आ चुकी हैं। डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने में असफल रही है और अब परीक्षाओं की गोपनीयता भी सुरक्षित नहीं रख पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले में अब तक एनटीए के किसी बड़े अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री नसीम अख्तर, शिव प्रकाश गुर्जर, सौरभ बजाड, मोहित खंडेलवाल, राजनारायण असोपा, संजय जोशी, शैलेंद्र अग्रवाल, वाहिद मोहम्मद, लक्ष्मी धौलखेड़िया, चंदन सिंह और मनीष सेन सहित कई लोग मौजूद रहे।
यह हैं मांगें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें
नीट 2026 की प्रक्रिया की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को भंग किया जाए
पेपर लीक में शामिल शिक्षा माफिया और अधिकारियों की गिरफ्तारी हो
विद्यार्थियों को मानसिक और आर्थिक क्षति का मुआवजा दिया जाए
कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और एजेंसी कॉन्ट्रेक्ट सार्वजनिक किए जाएं
प्रिंटिंग प्रेस और सुरक्षा प्रबंधन कंपनियों की न्यायिक जांच कराई जाए