नागौर में मदर लैब की बड़ी लापरवाही: O पॉजिटिव खून को बताया B नेगेटिव, गलत ब्लड चढ़ने से जा सकती थी जान

Nagaur Mother Lab: नागौर जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय जिला चिकित्सालय की सरकारी लैब को बंद कर पुराना अस्पताल परिसर में खोली गई मदर लैब के कार्मिकों की ओर से लापरवाही बरतने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। पूर्व में एक जांच की जगह चार-पांच जांच करने का मामला अभी शांत नहीं हुआ कि शुक्रवार को एक मरीज की जांच रिपोर्ट बदलने का गंभीर मामला सामने आया है।

इस बारे में जब मदर लैब के टेक्निकल ऑपरेशन मैनेजर से बात की तो उन्होंने झूठा आरोप लगाने पर एफआईआर दर्ज कराने की धमकी तक दे डाली। दरअसल, खींवताना निवासी सरोज (23) बीमार होने पर परिजन उसे लेकर जेएलएन अस्पताल गए, जहां डॉक्टर ने सीबीसी जांच कराने के लिए कहा।

सरोज ने दोपहर करीब एक बजे सैंपल दिया और करीब साढ़े तीन बजे उसके भाई सुनील को चार पेज की जांच रिपोर्ट दी, जिसमें ब्लड ग्रुप ‘बी नेगेटिव’ बताया गया। तब तक आउटडोर समय पूरा होने पर वह जांच रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के क्लीनिक पर गया, जहां क्लीनिक के कार्मिकों को शक हुआ तो उन्होंने दोबारा जांच की, जिसमें ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ आया।

दोनों रिपोर्ट अलग-अलग आने पर उन्होंने तीसरी बार जांच की, लेकिन ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ ही आया। इसके बाद शहर के एक अन्य निजी लैब से जांच कराई, वहां भी ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ आया।

इस पर परिजनों ने राजस्थान पत्रिका कार्यालय में सम्पर्क कर पूरी बात बताई। संवाददाता ने जब मदर लैब के टेक्निकल ऑपरेशन मैनेजर से बात की तो उन्होंने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि यह जांच रिपोर्ट एमसीएच विंग में भर्ती सरोज की है, जिसका किसी ने फोटो खींच कर वायरल किया है, हम उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे।

जब उन्हें बताया कि जांच रिपोर्ट की हार्ड कॉपी परिजनों के पास है, जो उन्हें जेएलएन अस्पताल के काउंटर से दी गई है। इस पर उन्होंने तर्क दिया कि एक जांच रिपोर्ट की केवल एक ही कॉपी निकाली जाती है, ऐसा नहीं हो सकता।

इसके बाद शनिवार सुबह सरोज का भाई सुनील जांच रिपोर्ट लेकर आया और लैब में जाकर दिखाई तो कार्मिकों ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि एक ही नाम की दो सरोज होने से गलती से रिपोर्ट बदल गई।

आखिर कब थमेगी लापरवाही

सरोज के परिजनों का कहना है कि यदि एमसीएच में भर्ती सरोज की रिपोर्ट के आधार पर उनकी सरोज का उपचार कर दिया जाता या आवश्यकता पड़ने पर खून चढ़ा दिया जाता तो उसकी जान भी जा सकती थी। इससे पहले भी अस्पतालों में हुई लापरवाही के कारण मरीजों की जान जा चुकी है। ऐसे में लापरवाही का जिम्मेदार कौन होता?

लापरवाही की हद पार

मैंने अपनी बहन सरोज को बीमार होने पर 8 मई को जेएलएन अस्पताल में दिखाया, जहां डॉक्टर ने उसकी खून की जांच कराने के लिए कहा। जांच के लिए हमने दोपहर करीब एक-डेढ़ बजे सैंपल दिया। उसके बाद करीब साढ़े तीन बजे हमें रिपोर्ट दी गई। तब तक डॉक्टर घर जा चुके थे, इसलिए मैं उनको दिखाने क्लीनिक पर गया, जहां स्टॉफ को शक हुआ तो उन्होंने वापस जांच की, जिसमें ब्लड ग्रुप अलग-अलग था।

इस पर मैंने शहर के एक अन्य लैब में जांच कराई तो भी सरकारी लैब की रिपोर्ट से अलग रिपेार्ट मिली। बाद में हमें मदर लैब के कार्मिक ने बताया कि गलती से दूसरी सरोज की रिपोर्ट उन्हें दे दी। यह गंभीर लापरवाही है, यदि जेएलएन अस्पताल की जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार कर देते तो कुछ भी हो सकता था।
-सुनील, सरोज का भाई, खींवताणा निवासी

गलती से बदल गई रिपोर्ट

जेएलएन अस्पताल और एमसीएच विंग में सरोज नाम की दो पेशेंट ने जांच करवाई। दोनों उम्र भी समान थी, जिसके कारण गलती से एक की रिपोर्ट दूसरी को दे दी।
-दीपक बिशेन, टेक्निकल ऑपरेशन मैनेजर, मदर लैब