उदयपुर: शहर के सबसे व्यस्त और जाम झेलते पारस तिराहा-पटेल सर्कल पर अब यातायात सुगम होगा। अंडरब्रिज निर्माण कार्य पूरा हो गया। यहां अंतिम सफाई, फिनिशिंग और तकनीकी काम चल रहे हैं। जज्द अंडरब्रिज से वाहनों का संचालन शुरू होगा।
इसी प्रोजेक्ट के तहर बन रहे फ्लाइओवर के 11 पिलर भी तैयार हो चुके हैं। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसका कार्य दीपावली तक पूर्ण होने की संभावना है। इस पूरे प्रोजेक्ट के पूरा होते ही पारस तिराहे का जाम से मुक्ति मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, पारस तिराहे पर बने अंडरपास का हिस्सा जल्द ही वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे यातायात का दबाव तुरंत कम होगा। यह अंडरपास यातायात को दो हिस्सों में विभाजित करेगा, जिससे शहर के प्रमुख मार्गो पर जाम की स्थिति काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
अंडरपास एक नजर में
210 मीटर कुल लंबाई
30 मीटर लंबा बॉक्स सेल ऊंचाई
05 मीटर चौड़ाई और 4.5 मीटर चौड़ाई
फ्लाईओवर निर्माण में तेजी, 11 पिलर पूरे
42.30 करोड़ रुपए से बन रहे फ्लाइओवर के सभी 11 पिलर और 2 एबटमेंट तैयार हो चुके हैं। अब पिलर के बीच सेगमेंट (गर्डर) का काम शुरू होगा, जो निर्माण का सबसे अहम चरण माना जाता है।
फ्लाईओवर की लंबाई लगभग 550 मीटर है और यह बलीचा की ओर से शुरू होकर सेल टैक्स ऑफिस क्षेत्र तक पहुंचेगा। योजना के अनुसार, प्रोजेक्ट को दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है। निर्माण की वर्तमान गति को देखते हुए यूडीए ने काम दीपावली 2026 तक भी पूरा होने की उम्मीद जताई है।
बदलेगा ट्रैफिक का नक्शा
बलीचा से सवीना और बस स्टैंड की ओर जाने वाले वाहनों को पारस तिराहे पर बन रहा फ्लाइओवर और अंडरपास यातायात व्यवस्था को नया रूप देगा। दिसंबर 2026 तक पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट से रोज एक लाख से ज्यादा लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।
ट्रैफिक के नए पैटर्न से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सवीना, बलीचा और पटेल सर्कल की ओर आवागमन ज्यादा सुगम होगा। फ्लाइओवर से गुजरते वाहन बिना रुके शहर में प्रवेश कर सकेंगे, जबकि अंडरपास से भारी वाहन और स्थानीय ट्रैफिक को अलग रास्ता मिलेगा।
ऐसे बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम
बलीचा से रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जाने वाले वाहन फ्लाईओवर से सीधे गुजरेंगे।
सवीना की ओर से आने वाले वाहन सर्विस रोड और अंडरपास का उपयोग करेंगे।
खांजीपीर, पिछोला, जगदीश मंदिर आदि जाने वाले वाहन सर्विस रोड से सीधे जाएंगे।
भारी और लंबी दूरी के वाहन अंडरपास के जरिए अलग मार्ग से निकलेंगे।
इस व्यवस्था से हर दिन गुजरने वाले हजारों वाहनों का दबाव एक जगह केंद्रित नहीं होगा।