पाली। डीएमआईसी प्रोजेक्ट के तहत अवाप्त की गई भूमि का मुआवजा पिछले कई महीनों से अटका हुआ है। जानकारी के अनुसार भू-माफियाओं और पटवारियों की मिलीभगत के कारण रिपोर्ट समय पर जमा नहीं हो रही है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और सरकार पर ब्याज का बोझ बढ़ रहा है।
यह वीडियो भी देखें
जेपीएमआईए ने मार्च माह में किसानों की भूमि अवाप्ति के लिए 677.64 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की थी। इसके लिए अवार्ड भी जारी हो चुके हैं, लेकिन राशि किसानों के खातों में नहीं पहुंची है। मुआवजा वितरण के लिए मार्च में रोहट, निम्बली, दुदली और सिणगारी में विशेष शिविर लगाए गए थे, जो केवल औपचारिकता बनकर रह गए। अधिकारियों ने दस्तावेज पूरे होने पर तुरंत भुगतान का वादा किया था, लेकिन हकीकत में काश्तकार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
भू-माफिया सक्रिय
क्षेत्र में भूमि की डीएलसी दरें कम होने के कारण किसानों ने लंबी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद सरकार ने भूमि के बदले भूमि देने के आदेश जारी किए। इसी का फायदा उठाकर भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं। भू-माफिया पटवारियों के साथ मिलकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं और सरकारी दर से थोड़ी अधिक राशि देकर जमीनें बाहरी कंपनियों को बेच रहे हैं। कंपनियां इन जमीनों को खरीदकर आम मुख्तयारनामा तैयार करवा रही हैं, ताकि सरकार से मिलने वाली ‘भूमि के बदले भूमि’ के लाभ पर दावा कर सकें। इसी प्रक्रिया को फायदा पहुंचाने के लिए पटवारी जानबूझकर रिपोर्ट तैयार कर रीको को सुपुर्द नहीं कर रहे हैं।
40 से अधिक रिपोर्ट अभी भी लंबित
नियमों के मुताबिक तहसीलदार के माध्यम से पटवारी की रिपोर्ट मिलने के बाद ही मुआवजा खाते में डाला जाता है। रोहट तहसील के बी-फेस के तहत रोहट, सिणगारी, दुदली और निम्बली के कई मामले अटके हुए हैं। अकेले रोहट पटवारी की 40 से अधिक (तहसीलदार के अनुसार 53) रिपोर्ट अभी भी लंबित हैं। किसानों ने इस संबंध में उपखंड अधिकारी और जिला कलक्टर से शिकायत की थी। कलक्टर ने बैठक लेकर तहसीलदार और पटवारियों को तुरंत रिपोर्ट देने के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है।
इन्होंने कहा
डीएमआईसी भूमि अवाप्ति प्रक्रिया में रोहट पटवारी की 53 रिपोर्ट बाकी हैं। बार-बार कहने के बावजूद रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। जांच रिपोर्ट आते ही जेपीएमआईए को भेज दी जाएगी, जहां से भुगतान संभव होगा।
मांगीलाल मीणा, तहसीलदार, रोहट
मुआवजा राशि कब आएगी, यह किसानों को बताने की जरूरत नहीं है। भूमि के बदले भूमि देने की प्रक्रिया चल रही है। हल्का पटवारी की रिपोर्ट और दस्तावेज आने का इंतजार है।
शिवचरण शर्मा, भूमि अवाप्त अधिकारी, डीएमआईसी रीको