जयपुर। भारत सरकार इन दिनों मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणालियों पर तेजी से काम कर रही है। 2 मई को इसको लेकर टेस्टिंग की जाएगी। इस परीक्षण में राजस्थान की राजधानी जयपुर भी शामिल है। ऐसे में जयपुर क्षेत्र में संचालित मोबाइल फोन पर 2 मई को अचानक खतरे की घंटी बजेगी इसको लेकर पीआईबी ने जानकारी साझा की है। इस दौरान लोगों को घबराना नहीं है, क्योंकि यह कोई असली खतरा नहीं है, बल्कि यह एक परीक्षण होगा।
यह पहल संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के संयुक्त प्रयास से तैयार की गई है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य किसी भी आपदा या आपात स्थिति में लोगों तक तुरंत और सटीक सूचना पहुंचाना है। 2 मई को इस सिस्टम का औपचारिक शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में किया जाएगा।
जयपुर परीक्षण क्षेत्र में शामिल
परीक्षण के दौरान जयपुर सहित देश की सभी राज्य राजधानियों में मोबाइल यूजर्स को एक टेस्ट मैसेज प्राप्त होगा। यह संदेश हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में भेजा जाएगा। इसके साथ ही मोबाइल पर एक तेज चेतावनी ध्वनि भी सुनाई दे सकती है, जो आमतौर पर आपातकालीन अलर्ट के समय उपयोग होती है।
नई तकनीक ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ पर आधारित
यह नई तकनीक ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ पर आधारित है, जिसके जरिए किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ संदेश भेजा जा सकता है। इससे अलर्ट लगभग तुरंत लोगों तक पहुंच जाता है, जो आपदा के समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस प्रणाली को स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है और इसका संचालन C-DOT द्वारा किया जा रहा है।
आपात स्थिति में किया जा सकेगा अलर्ट
सरकार पहले से ही SMS आधारित अलर्ट सिस्टम का उपयोग कर रही है, जिसके जरिए अब तक करोड़ों लोगों तक मौसम और आपदा से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जा चुकी है। लेकिन नई सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के जरिए यह प्रक्रिया और तेज तथा प्रभावी होगी।
2 मई को होगा परीक्षण
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 2 मई को मिलने वाला संदेश केवल परीक्षण का हिस्सा है। लोगों को इससे घबराने या किसी तरह की कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। इसका मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी आपात स्थिति के दौरान सूचना समय पर हर नागरिक तक पहुंच सके और जनहानि को कम किया जा सके।