Medical Facilities: जयपुर. राज्य सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के क्रम में गुरुवार को जिला कलक्टर संदेश नायक ने जयपुर स्थित जे.के. लोन बाल चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं का गहनता से निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।
निरीक्षण के दौरान कलक्टर ने एनआईसीयू, आईपीडी, ओपीडी सहित विभिन्न वार्डों का दौरा किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपचार प्रक्रिया तथा व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल की प्रयोगशाला में जाकर जांच सेवाओं की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया।
परिजनों से संवाद,समस्याओं और सुझावों पर किया मंथन
औचक निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि उनकी बातों को प्राथमिकता के साथ लिया जाएगा और आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
परिजनों ने उपचार प्रक्रिया, दवाओं की उपलब्धता और सुविधाओं से जुड़ी अपनी राय साझा की। कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि उपचार के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
स्वच्छता, दवाइयों और उपकरणों की उपलब्धता पर दिए सख्त निर्देश
निरीक्षण में यह सामने आया कि अस्पताल में चिकित्सकीय सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं, लेकिन कुछ व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। इस पर जिला कलक्टर ने साफ-सफाई व्यवस्था को और मजबूत करने, आवश्यक दवाओं और उपकरणों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, अस्पताल प्रशासन को सभी व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने और निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
जिला कलक्टर ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा हर पहलू अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए चिकित्सा सेवाओं में उच्च गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है।
स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार की सकारात्मक पहल
जिला कलक्टर द्वारा जे.के. लोन बाल चिकित्सालय का औचक निरीक्षण एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आती है, बल्कि सुधार की दिशा भी तय होती है। परिजनों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनना प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यदि दिए गए निर्देशों पर प्रभावी अमल होता है, तो बच्चों को बेहतर और सुरक्षित चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। ऐसे निरीक्षण नियमित रूप से होते रहना बेहद आवश्यक है।