सरकारी विभागों में लेटलतीफी और बिना जमीनी हकीकत जाने आदेश निकालने का एक हास्यास्पद मामला सामने आया है। भारत सरकार के जल शक्ति अभियान के तहत स्कूलों में जल संरक्षण के प्रति जागरुकता लाने के लिए जल पखवाड़ा मनाया जाना था। ताज्जुब की बात यह है कि जो आयोजन 16 अप्रेल से 30 अप्रेल तक होना था, उसका आदेश राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने 25 अप्रेल को जारी किया है। पखवाड़ा खत्म होने में महज पांच दिन बचे हैं और अब तक जिले के स्कूलों में इसकी कोई भनक तक नहीं है।
क्या है इस लेटलतीफ आदेश में
अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक अशोक कुमार मीणा के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में प्रदेश के सभी विद्यालयों में 16 से 30 अप्रेल 2026 तक जल पखवाड़ा मनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य जल शक्ति अभियान कैच द रेन के तहत जल संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाना है। इसके तहत स्कूलों में कई आयोजन होने हैं। इसके तहत प्रतिदिन प्रार्थना सभा में जल शपथ का आयोजन। पहले सप्ताह में एसएमसी या पीटीए की बैठक और जल संरक्षण पर कार्यशाला। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए चित्रकला, वाद-विवाद, निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं। प्रतिदिन शाम 5 बजे तक गतिविधियों की फोटो और रिपोर्ट परिषद की ईमेल आईडी पर भेजना अनिवार्य।
हवा-हवाई हुआ अभियान, शिक्षक हैरान
परिषद के इस फरमान ने भीलवाड़ा जिले के शिक्षा महकमे में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। जो अभियान 16 अप्रेल से शुरू होकर अपने अंतिम चरण में होना चाहिए था, उसके बारे में जिले के स्कूल पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। जब इस संबंध में जिले के संस्था प्रधानों और शिक्षकों से जानकारी चाही गई, तो उनका साफ कहना था कि इस तरह का कोई आदेश अभी तक हमें प्राप्त ही नहीं हुआ है। जब आदेश ही नहीं आया, तो फिर कौनसा पखवाड़ा मनाएं। राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के अध्यक्ष नीरज शर्मा का कहना है कि सरकार केवल आदेश निकालने में लगी है। जबकि धरातल पर कोई काम पूरे होते ही नहीं है। जल पखवाड़ा मनाना अच्छी बात है, लेकिन समय निकलने के बाद आदेश जारी करना तथा फिर संस्था प्रधान व शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करना कहां तक उचित होगा। इस पर सरकार को मंथन करना चाहिए।