Police Staff Shortage: जोधपुर.राजस्थान में पुलिस बल के स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती के बीच बढ़ती खाई अब कानून व्यवस्था पर सीधा असर डाल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक रिक्तियां उन्हीं पदों पर हैं, जो सीधे जनता से जुड़कर कानून व्यवस्था संभालते हैं। सब-इंस्पेक्टर के 5,167 स्वीकृत पदों में से 2,357 पद खाली हैं, यानी लगभग 45.62 प्रतिशत की कमी। इसी तरह एएसआइ के 12,313 पदों में 3,797 पद रिक्त हैं, जो करीब 30.84 प्रतिशत है।
हेड कांस्टेबल के 20,093 पदों में 5,010 पद खाली हैं, जबकि इंस्पेक्टर स्तर पर भी 21.50 प्रतिशत पद रिक्त हैं। ये सभी पद थानों और फील्ड ड्यूटी की रीढ़ होते हैं, जहां से कानून व्यवस्था संचालित होती है। इनकी कमी से अपराध जांच, प्राथमिकी दर्ज करने, गश्त और विवाद निस्तारण जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे आम जनता की सुरक्षा कमजोर पड़ रही है।
इनकी ड्यूटी खत्म ही नहीं होती
पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्टाफ की कमी के कारण एक-एक कर्मी को कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। थानों में जांच, गश्त, वीआइपी ड्यूटी, त्योहारों और चुनाव की व्यवस्था जैसे सभी कार्य सीमित कर्मचारियों पर निर्भर हैं। इससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और पुलिसकर्मियों पर मानसिक व शारीरिक दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार 24 घंटे ड्यूटी, अवकाश की कमी और बढ़ता कार्यभार उन्हें तनावग्रस्त बना रहा है, जिससे उनके व्यवहार और निर्णय क्षमता पर असर पड़ सकता है। यदि यह स्थिति बनी रही तो कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ना तय है।
आरपीएस के 17 फीसदी पद खाली
आइपीएस और आरपीएस स्तर पर रिक्तियों का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है। आइपीएस के महज 5.4 प्रतिशत पद ही रिक्त है जबकि आरपीएस (डिप्टी एसपी के 724 पदों में से 164 और एडिशनल एसपी के 479 पदों में से 52 पद खाली है।) में 17.95 प्रतिशत पद खाली है। हाल ही में हुई आरएएस भर्ती में इनके पद भरने की संभावना है। इससे स्पष्ट है कि नीति निर्माण स्तर पर तो स्टाफ उपलब्ध है, लेकिन उसे जमीन पर लागू करने वाला तंत्र कमजोर हो रहा है।
प्रदेश में पुलिस कर्मियों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों की स्थिति
पद (Post)स्वीकृत (Sanctioned)कार्यरत (Working)रिक्त (Vacant)प्रतिशत (%)आईपीएस (IPS)222210125.40%आरपीएस (RPS)120398721617.95%इंस्पेक्टर2316181849821.50%एसआई (SI)51672810235745.62%एएसआई (ASI)123138516379730.84%हेड कांस्टेबल2009315083501024.93%कांस्टेबल842027613880649.58%
एसआई (SI)– सब इंस्पेक्टर / प्लाटून कमांड
एएसआई (ASI)– असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर
एक्सपर्ट व्यू…
संयुक्त राष्ट्र के मानकों के अनुसार प्रति एक लाख जनसंख्या पर 222 पुलिसकर्मी होने चाहिए, जबकि देश में बीपीआरडी के अनुसार केवल 153 उपलब्ध हैं। राजस्थान में 2024 के आंकड़ों के अनुसार यह संख्या मात्र 119 प्रति लाख है। पुलिस बल की इस कमी को शीघ्र दूर करना आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा असर अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था पर पड़ता है। अधिक कार्यभार से पुलिसकर्मी तनावग्रस्त हो रहे हैं, जिससे कार्य क्षमता प्रभावित होती है। सभी स्तरों पर भर्ती बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षण भी जरूरी है।
डॉ. आलोक त्रिपाठी, कुलगुरु, सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा और दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय, जोधपुर