परिवीक्षा काल पूर्ण… फिर भी दिव्यांग शिक्षक नहीं हुए नियमित

जिले के लगभग दो दर्जन शिक्षक ऐसे जिनका अक्टूबर में हुआ परिवीक्षा काल पूर्ण

नियमित नहीं होने के कारण मिल रहा फिक्स वेतन

बोले शिक्षक: जो शिक्षक पात्रता योग्य उनको तो किया जाए नियमित

धौलपुर. जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में कार्यरत दो दर्जन दिव्यांगजन शिक्षकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इन कार्मिकों के पिछले साल अक्टूबर महीने में दो वर्ष का परिवीक्षा काल पूर्ण करने के बाद भी स्थायीकरण आदेश जारी नहीं किए गए हैं। जिससे इन कार्मिकों को नियमित वेतन शृंखला के तहत पूरा वेतन मिलने की बजाय अभी तक महज 23700 रुपए फिक्स मानदेय ही मिल रहा है।

समाज दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता रखता है, लेकिन शिक्षा की ज्योति बिखेरने वाला महकमा शिक्षा विभाग अपने दिव्यांग कार्मिकों के प्रति असंवेदनशील बना हुआ है। दरअसल लगभग दो दर्जन दिव्यांग शिक्षक ऐसे हैं जिनका दो वर्ष का परिवीक्षा काल पूर्ण पिछले साल अक्टूबर में ही पूरा हो चुका है, ेलेकिन विभाग ने अभी तक उनके नियमितीकरण के आदेश जारीं नहीं किए हैं। जिस कारण इन दिव्यांग शिक्षकों को फिक्स मानदेय ही मिल रहा है। जिससे इन शिक्षकों के परिवार का जीवन यापन करने में आर्थिक तंगी का शिकार होना पड़ रहा है। लेकिन अन्य शिक्षकों की तरह इन कार्मिकों को शिक्षा विभाग की ओर से नियमित वेतन शृंखला के तहत वेतन निर्धारण भी नहीं किया जा रहा है।

निर्दोश और दोषी के साथ समान कार्रवाई

बसेड़ी में कार्यरत अध्यापक रामदेव दनगश व धौलपुर ब्लॉक में तैनात यादवेंद्र सिंह ने बताया कि विभागीय आदेशों की पालना में जो कार्मिक संभाग स्तर पर गठित मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं हुए या जिनके प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। और निर्दोष एवं दोषी को समान समझ कर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है । दिव्यांग कोटे से नियुक्त धीरज परमार व सत्यभान आदि शिक्षकों ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कार्यालय बेवजह दिव्यांग जन कार्मिकों के पुन: परीक्षण के नाम पर मानसिक एवं आर्थिक उत्पीडऩ कर रहा है, जबकि अधिकतर शिक्षकों ने मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होकर अपने प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा चुका है।

दो माह में करनी थी दिव्यांग शिक्षकों की जांच

शिक्षकों ने बताया कि निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर की ओर से 10 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर शिक्षा विभाग में कार्यरत दिव्यांगजन कार्मिकों का पुन: परीक्षण करवाए जाने के निर्देशों की पालना दो माह के भीतर संपादित किए जाने के आदेश दिए थे, लेकिन महीनों बाद भी जिन कार्मिकों के दस्तावेज जांच में सही पाए गए उनके ना तो नियमित वेतन शृंखला के तहत पूरा वेतन के आदेश किए हैं और ना ही स्थायीकरण किया जा रहा है। केवल जांच के नाम पर स्थायीकरण करने की बजाय लटकाकर आर्थिक व मानसिक उत्पीडऩ किया जा रहा है।

जुलाई से नहीं मिली मिड डे मील की राशि

देखा जाए तो शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली का ही असर है कि स्कूलों में अव्यवस्थाएं बढ़ती जा रही हैं। विभाग ने अभी तक कई स्कूलों में मिड डेल मील का बजट भी जारी नहीं किया है। जिस कारण संस्था प्रधानों को खुद अपनी जेब से रुपए खर्च कर बच्चों को खाना खिलाना पड़ रहा है। जिले के कई स्कूल ऐसे हैं जिन्हें जुलाई माह से मिड डे की राशि आवंटित नहीं की गई है।

कार्मिकों के स्थायीकरण कराने की मांग

राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हरीसिंह गुर्जर का कहना है कि शिक्षा विभाग शिक्षकों की समस्याओं के समय पर निस्तारण के प्रति गंभीर नहीं है। शिक्षकों के स्थायीकरण एएमएसीपी व स्कूलों को समय पर एमडीएम दूध की राशि आवंटित नहीं की जाती है। संघ के पूर्व प्रदेश महामंत्री एवं अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि दिव्यांगजन सहित ऐसे सभी शिक्षकों जिन्होंने दो वर्ष का संतोषजनक परिवीक्षा काल पूर्ण कर डीईओ एलिमेंट्री कार्यालय ऑन लाइन आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं तथा जिनके नियुक्ति के समय प्रस्तुत दिव्यांग प्रमाण पत्र मेडिकल बोर्ड के समक्ष पुन: परीक्षण में सही पाए गए हैं। ऐसे सभी शिक्षकों के तत्काल स्थायीकरण आदेश जारी करने चाहिए।