चिड़ावा (झुंझुनूं)। रोजाना की तरह दूध सप्लाई कर घर लौट रहे 55 वर्षीय मेहरचंद को यह अंदाजा नहीं था कि यह उनका आखिरी सफर साबित होगा। चिड़ावा बाइपास पर सांड के कारण हुए दर्दनाक हादसे में उनकी जान चली गई और पीछे उनका परिवार बेसहारा हो गया।
यह वीडियो भी देखें
दरअसल, माखर की ढाणी निवासी मेहरचंद चिड़ावा में हलवाई को दूध देकर बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। रात के समय जब वे ओजटू बाइपास रोड पर पहुंचे, तभी अचानक सड़क के बीच आए सांड से उनकी बाइक टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि सांड के सींग उनके सीने में धंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सींग उनके सीने को आर-पार कर गए। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने उन्हें तुरंत निजी वाहन से राजकीय उप जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रातभर अस्पताल की मोर्चरी में शव रखा रहा। सुबह जब परिजनों ने शव देखा तो चीख-पुकार मच गई। घर के मुखिया को खोने का गम हर चेहरे पर साफ नजर आया। मेहरचंद के दो बेटे और एक बेटी हैं। परिजनों ने बताया कि वह रोज मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करते थे और उसी जिम्मेदारी को निभाते हुए उनकी जान चली गई। मृतक के भतीजे विनोद कुमार की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई राजेंद्र कुमार ने परिजनों से जानकारी ली और मौके का मुआयना किया।
10 दिन पहले भाई की मौत
करीब दस दिन पहले ही मेहरचंद के बड़े भाई, सेवानिवृत्त सूबेदार सरदार सिंह जाखड़ का हार्ट अटैक से निधन हुआ था। गांव में अभी उनके शोक का माहौल खत्म भी नहीं हुआ था कि यह दूसरी दुखद घटना हो गई।
बेटे-बेटी की शादी की थी तैयारी
मेहरचंद ने अपने बड़े बेटे विक्रम और बेटी पूनम का रिश्ता तय कर रखा था। दो महीने बाद दोनों की शादी थी। घर में तैयारियां चल रही थीं, लेकिन उससे पहले ही परिवार पर यह दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
हमेशा जाता था पिकअप से
परिजनों ने बताया कि मेहरचंद पिछले करीब 20 वर्षों से दूध सप्लाई का काम कर रहे थे। वे रोज पिकअप से दूध लेकर जाते थे, लेकिन शुक्रवार को दूध कम होने के कारण बाइक से ही चिड़ावा गए। लौटते समय अंधेरे में काले रंग का सांड नजर नहीं आया और हादसा हो गया। उन्होंने हेलमेट भी पहन रखा था, लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी कि उनकी जान नहीं बच सकी।