ब्लैकआउट के पूर्वाभ्यास से करीब एक साल पुरानी यादें हुईं ताजा

सीमांत जैसलमेर में शुक्रवार की रात करीब एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पड़ोसी देश के खिलाफ भारतीय सेना के पराक्रम और पाकिस्तान की ओर से जैसलमेर जिले में किए गए ड्रोन हमले की यादें एक बार फिर जेहन में उभर आई। सरहदी जैसलमेर में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार रात 8.30 बजे को मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट का अभ्यास किया गया। इस दौरान शहर में करीब एक दर्जन स्थलों पर स्थापित किए गए सायरन से चेतावनी का अलार्म बजा। अलार्म की गूंज 5 मिनट तक वातावरण में गूंजती रही।

प्रशासन ने एक दिन पहले ही बताया था कि यह हवाई हमले का संकेत माना जाएगा। सायरन की आवाजह सुनते ही अधिकांश लोगों ने अपने घरों, दुकानों और शोरूम की बिजली, इनवर्टर, जनरेटर और मोबाइल टॉर्च तक बंद कर दिए। सडक़ों पर चल रहे वाहनों की लाइट और हाइवे की हाइमास्ट लाइट्स को भी तुरंत बंद किया गया। इस तरह से पूरा शहर अंधेरे की आगोश में समाया हुआ रहा। ब्लैकआउट की अवधि करीब 15 मिनट रही।

सडक़ों पर अव्यवस्था के हालात नहीं बने, इसके लिए पुलिस बल को जगह-जगह तैनात किया गया। ब्लैकआउट का समापन 2 मिनट के ऑल क्लियर सायरन के बजने के साथ हुआ। उसके बाद पुन: लाइट व्यवस्था बहाल हो गई। ब्लैकआउट के दौरान प्रशासन की तरफ से हॉटलाइन, रेडियो कम्युनिकेशन और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली को जांचा गया। इसी तरह पुलिस, मेडिकल टीम और फायर ब्रिगेड की क्विक रिस्पांस टीम का भी परीक्षण हुआ।

लोगों ने किया सहयोग

प्रशासन की तरफ से किसी भी आपात स्थिति के लिए लोगों को तैयार रहने के प्रशिक्षण के रूप में किए गए ब्लैकआउट को आमजन ने पूर्ण सहयोग दिया। रात 8.30 बजे सायरन की आवाज सुनते ही लाइट्स ऑफ कर दी गई। सडक़ों पर आवाजाही कर रहे वाहन चालक सायरन की आवाज सुनते ही जहां के तहां थम गए। उन्होंने वाहन को किनारे खड़ा कर दिया और लोग आपस में बतियाते नजर आए।

‘एयरस्ट्राइक’ से लगी आग, घायलों का किया रेस्क्यू

जैसलमेर में शुक्रवार शाम इंदिरा कॉलोनी में एयर स्ट्राइक का मॉक ड्रिल किया गया। इसके तहत कॉलोनी के विस्तृत चौराहा पर आग लगी। इसकी सूचना दिए जाने पर नगरपरिषद और नागरिक सुरक्षा के दमकल वाहन और स्वयंसेवक मौके पर पहुंचे। साथ ही पुलिस व सरकार की अन्य एजेंसियों व विभागों के प्रतिनिधि भी कुछ देरी में पहुंच कर राहत व बचाव कार्य में जुटे। दमकल की गाडिय़ों ने आग पर काबू पाया और स्वयंसेवकों ने चौराहा के पास बनी इमारत में घायलों को स्ट्रेचर पर लेटा कर बाहर निकाला। उन्हें एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के तालमेल और रेस्पॉन्स समय को परखा गया। एयर स्ट्राइक के मॉक ड्रिल की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी पहुंचे।