जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान के विकास की रफ्तार अब सड़कों के माध्यम से और तेज होने जा रही है। विश्व बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स बोर्ड ने राज्य में हाईवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 225 मिलियन डॉलर के बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।
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इस परियोजना का सीधा असर जोधपुर सहित पूरे मारवाड़ क्षेत्र पर देखने को मिलेगा, जहां लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 800 किलोमीटर लंबे चुनिंदा हाईवे कॉरिडोर को अपग्रेड किया जाएगा। इसमें जोधपुर-जयपुर जैसे महत्वपूर्ण मार्ग भी शामिल हैं, जो पर्यटन, खनन और व्यापारिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं।
जोधपुर को क्या होगा फायदा
जोधपुर क्षेत्र में खनन, हस्तशिल्प और पर्यटन प्रमुख आर्थिक आधार हैं, लेकिन कमजोर सड़क ढांचा अक्सर विकास में बाधा बना रहा है। इस परियोजना के बाद माल परिवहन तेज होगा, लागत में कमी आएगी और स्थानीय उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जोधपुर आने वाले पर्यटकों को अब बेहतर और सुरक्षित यात्रा अनुभव मिलेगा, जिससे होटल और ट्रैवल सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
सड़क सुरक्षा पर खास फोकस
राज्य में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए इस योजना में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। लगभग 250 किलोमीटर के उच्च जोखिम वाले कॉरिडोर पर डिजिटल सिस्टम के माध्यम से ट्रैफिक मॉनिटरिंग और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक निर्माण मॉडल के बजाय रोड ऐज अ सर्विस कॉन्सेप्ट अपनाया जाएगा। यानी अब केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि उसकी पूरी जीवन चक्र के दौरान गुणवत्ता, सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव पर ध्यान दिया जाएगा।
नए फाइनेंस मॉडल से कम होगा दबाव
इस परियोजना में पहली बार स्टेप-अप लोन मॉडल लागू किया जा रहा है, जिससे शुरुआती वर्षों में वित्तीय दबाव कम रहेगा। इसके साथ ही पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से लगभग 295 मिलियन डॉलर का निजी निवेश भी जोड़ा जाएगा। विश्व बैंक के अनुसार राजस्थान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में 11 प्रतिशत की दर से विकास कर रही है, लेकिन सड़क नेटवर्क उस गति से नहीं बढ़ पाया। ऐसे में यह परियोजना राज्य के विकास को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से अच्छी सड़कों का प्रतिशत 40 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है और प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।