Akshaya Tritiya 2026 Special : जायल (नागौर)। पर्यावरण संरक्षण और आस्था का अद्भुत संगम ग्राम रोटू बिश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल है। 511 वर्ष पूर्व अक्षय तृतीया के दिन बिश्नोई समाज के संस्थापक गुरु जम्भेश्वर यहां अपनी परम भक्त उमा बाई का मायरा भरने पहुंचे थे। गांव में गुरु के पदचिह्नों पर बना भव्य मंदिर और एक ही रात में लगे 3700 खेजड़ी के पेड़ आज भी श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं।
बिश्नोई परंपरा के अनुसार विक्रम संवत 1572 बैशाख सुदी तृतीया के दिन गुरु जम्भेश्वर रोटू गांव पहुंचे। भक्त उमा बाई के घर के आगे गुवाड़ में रथ से उतरते ही उन्होंने एक पत्थर की शिला पर चरण रखा, जो तत्काल पिघल गई और उस पर उनके पदचिह्न अंकित हो गए। ये पवित्र चरणचिह्न आज भी मंदिर में सुरक्षित हैं। इनके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
14 हजार भक्तों के साथ भरा 56 करोड़ का मायरा
बिश्नोई साहित्य के अनुसार गुरु जम्भेश्वर ने उमा बाई के यहां अक्षय तृतीया के दिन भव्य मायरा भरा था। इस दौरान उनके साथ करीब 14 हजार भक्त और उस समय के कई प्रमुख शासक मौजूद थे। इनमें राव मालदे, राणा सांगा, राव दूदा, राव बीदा, राव जेतसी, राव हमीर भाटी और राव लूणकरण भाटी शामिल थे। इस अवसर पर 56 करोड़ का मायरा भरा गया था, जो उस समय की अद्वितीय घटना मानी जाती है।
लगा है मरुस्थल का कल्पवृक्ष
मायरा भरने के बाद जब अगले दिन भोज की तैयारी की बात हुई, तो जोधपुर नरेश राव मालदे ने क्षेत्र में पेड़ों की कमी और भीषण गर्मी की चिंता जताई। इस पर गुरु जम्भेश्वर ने आश्वासन दिया कि रात के अंतिम पहर में समाधान होगा। परंपरा के अनुसार उसी रात 3700 खेजड़ी के पेड़ एक साथ उग आए, जो आज भी गांव में मौजूद हैं। खेजड़ी, जिसे मरुस्थल का कल्पवृक्ष और राज्य वृक्ष का दर्जा प्राप्त है, यहां पूजनीय मानी जाती है और इसकी कटाई-छंटाई नहीं की जाती।
अक्षय तृतीया पर विशेष आयोजन
अक्षय तृतीया महोत्सव के तहत रोटू स्थित गुरु जम्भेश्वर साथरी में रविवार को भजन संध्या होगी। महंत स्वामी जुगतीप्रकाश महाराज के सानिध्य में हरिद्वार के आचार्य अखिलेश मुनि व पंडित हड़मान भजनों की प्रस्तुति देंगे, वहीं सोमवार को सुबह यज्ञ-हवन एवं पाहल का कार्यक्रम तथा दोपहर में उमा बाई के मायरा प्रसंग पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी।