कुंभलगढ़। गजपुर पंचायत के गांव बारिण्ड से निकली एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। हरपाल सिंह सोलंकी ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2024 में 319वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। शनिवार को परिणाम घोषित होते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने एक-दूसरे को बधाई देकर जश्न मनाया।
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‘हर परिस्थिति में हौसला बढ़ाया’
इस उपलब्धि के पीछे केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि एक पिता का संघर्ष, त्याग और बेटे का अडिग संकल्प छिपा हुआ है। हरपाल के पिता मोती सिंह सोलंकी पेशे से ड्राइवर हैं। उनका जीवन रोजाना लंबी दूरी तय करने, अनियमित समय पर काम करने और सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करने में बीता है। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे के सपनों को कमजोर नहीं होने दिया और हर परिस्थिति में उसका हौसला बढ़ाया।
ट्रेनी पटवारी के पद पर कार्यरत
हरपाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी की। वर्तमान में वे कांकरोली में ट्रेनी पटवारी के पद पर कार्यरत हैं। आरएएस परीक्षा में यह उनका तीसरा प्रयास था। पहले दो प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। सीमित संसाधनों में भी उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और आखिरकार सफलता हासिल की।
उम्मीद की नई किरण
गांव के लोगों के लिए यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि हरपाल ने यह साबित कर दिया कि यदि मेहनत सच्ची हो तो छोटे गांव से भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
पिता के संघर्ष से पूरा हुआ सपना
हरपाल बताते हैं कि बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को हर परिस्थिति में काम करते देखा है। उनके पिता सुबह जल्दी काम पर निकल जाते और देर रात घर लौटते थे। कई बार थकान के बावजूद वे बेटे की पढ़ाई के बारे में पूछते और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। यही प्रेरणा उनके जीवन की ताकत बनी।
मां मुन्ना कुंवर गृहिणी
उनकी मां मुन्ना कुंवर गृहिणी हैं, जिन्होंने भी हर कदम पर बेटे का साथ दिया। परिवार की सादगी और संघर्ष ने हरपाल को हमेशा जमीन से जोड़े रखा और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना सिखाया। आज जब हरपाल आरएएस अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो उनके पिता की आंखों में गर्व साफ झलकता है। यह सफलता केवल हरपाल की नहीं, बल्कि उस पिता के सपनों की जीत है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी अपने बेटे को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। वहीं बेटे की सफलता को देख पिता की आंखों में खुशी से आंसू छलक आए।