बांसवाड़ा/नई दिल्ली। राजस्थान के वागड़ अंचल की राजनीति में अपनी सादगी और जमीनी जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले सांसद राजकुमार रोत ने एक बार फिर सबका दिल जीत लिया है। सांसद रोत ने अपने निर्वाचन क्षेत्र और पैतृक गांव से आए बुजुर्गों के लिए दिल्ली में एक ‘विशेष अतिथि’ जैसा अनुभव साझा किया। उन्होंने ग्रामीणों को न केवल दिल्ली बुलाया, बल्कि उन्हें संसद भवन और सेंट्रल हॉल के गलियारों का भ्रमण कराकर देश की सत्ता के केंद्र से रूबरू कराया।
पहली बार देखा राष्ट्रपति भवन, खिले चेहरे
बांसवाड़ा के दूर-दराज गांवों से आए इन वरिष्ठजनों के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था। जिन आंखों ने ताउम्र खेतों की हरियाली और अरावली की पहाड़ियां देखी थीं, आज उन आंखों के सामने देश का भव्य राष्ट्रपति भवन और संसद की नई इमारत थी। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे अपने जीवनकाल में दिल्ली के इन ऐतिहासिक स्थलों को इतनी करीब से देख पाएंगे।
संसद भवन में सांसद रोत के परिचित ग्रामीण
केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों से ‘सीधा संवाद’
सांसद राजकुमार रोत केवल भ्रमण तक ही सीमित नहीं रहे, उन्होंने अपने गांव के लोगों की मुलाकात देश के बड़े राजनेताओं से भी करवाई।
केंद्रीय मंत्री: ग्रामीणों ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की।
वरिष्ठ नेता: राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी एवं तेलंगाना के सांसद नागेश गोडम से भी सांसद ने अपने गांव के लोगों का परिचय कराया। नेताओं ने भी ग्रामीणों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं।
संसद भवन में सांसद रोत के परिचित ग्रामीण
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें
सांसद रोत ने इस यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। उन्होंने पोस्ट में लिखा—
”नई दिल्ली में संसद भवन एवं सेंट्रल हॉल का मेरे गांव से आए वरिष्ठजनों को भ्रमण कराया। इस दौरान उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों से करवाई। मेरे गांव के वरिष्ठजनों को पहली बार देश की राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन और संसद भवन देखने का अवसर मिला।”
इन तस्वीरों में ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में संसद के भीतर और मंत्रियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जो राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और दिल्ली की आधुनिक सत्ता के संगम को दर्शाती हैं।
वागड़ की आवाज को दिल्ली में मिला नया आयाम
राजकुमार रोत का यह कदम केवल एक पर्यटन दौरा नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि लोकतंत्र में ‘अंतिम छोर’ पर खड़ा व्यक्ति भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कोई बड़ा राजनेता। वागड़ क्षेत्र के लोगों का दिल्ली की सत्ता के गलियारों तक पहुँचना आदिवासियों और ग्रामीणों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।