बीकानेर/देशनोक। प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा चाइनीज मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। देशनोक में 8 वर्षीय मासूम विराट की गर्दन मांझे से कटने से मौत हो गई। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाह सिस्टम की एक और दर्दनाक नाकामी है।
देशनोक थाना क्षेत्र के उदासर गांव निवासी विराट अपने माता-पिता और बहन के साथ बीकानेर शादी की खरीदारी के लिए जा रहा था। घर में उत्सव का माहौल था, लेकिन यह सफर परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा बन गया। देशनोक के थानाधिकारी सुमन शेखावत ने बताया कि चाइनीज मांझे का उपयोग कौन कर रहा है, इसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ओवरब्रिज पर ‘मौत का फंदा’
देशनोक ओवरब्रिज से उतरते समय हवा में लटक रहा चाइनीज मांझा अचानक विराट की गर्दन में उलझ गया। मांझा इतना धारदार था कि गर्दन गहराई तक कट गई। अत्यधिक रक्तस्राव से हालत बिगड़ी, अस्पताल पहुंचते-पहुंचते मौत हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, संभवतः केरोटिड आर्टरी कटने से जान नहीं बच सकी।
मजदूर परिवार पर टूटा कहर
विराट का परिवार ईंट भट्टे पर मजदूरी कर गुजर-बसर करता है। इकलौते बेटे की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। जिस घर में शादी की तैयारियां थीं, वहां अब सन्नाटा और मातम पसरा है।
बैन के बावजूद ‘मौत का धागा’ बाजार में
चाइनीज मांझा पहले से प्रतिबंधित है, इसके बावजूद बाजारों में खुलेआम बिक्री, ऑनलाइन और छुपकर सप्लाई, प्रशासन की ढीली कार्रवाई हर साल कई जिंदगियां छीन रहा है।
पत्रिका व्यू: हर साल हादसे, फिर भी नहीं जागता सिस्टम
मकर संक्रांति हो या अन्य अवसर, हर साल मांझे से जुड़ी मौतें सामने आती हैं। पक्षियों की मौत, बाइक सवारों के गले कटने की घटनाएं फिर भी न सख्ती, न स्थायी समाधान। हर बार चेतावनी, हर बार लापरवाही।जिम्मेदारी तय होगी या फिर चुप्पी?
अब सबसे बड़ा सवाल भी यही है। अवैध मांझा बेचने वाले, निगरानी में नाकाम प्रशासन या फिर इसे “दुर्भाग्य” कहकर मामला खत्म करने का वही पुराना रवैया चलेगा या कुछ बदलेगा भी।
विराट की मौत सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि चेतावनी है। अगर अब भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो अगले शिकार का जिम्मेदार भी प्रशासन ही होगा।