बजरी माफिया की दबंगई: किसान के खेत में डाला अवैध बजरी का स्टॉक

भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा थाना क्षेत्र में बजरी माफिया किसानों की निजी खातेदारी भूमि पर अवैध बजरी का स्टॉक करने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला भीमपुरा में सामने आया है, जहां एक किसान की गैरमौजूदगी में उसके खेत में माफिया ने सैकड़ों टन बजरी डंप कर दी। पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत के बाद खनिज विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से 360 टन अवैध बजरी जब्त कर पुलिस के सुपुर्द कर दी। भीमपुरा निवासी शहजाद खां की सरदारनगर पटवार हलके में कृषि भूमि है। शहजाद जब गाड़ी लेकर बाहर गए हुए थे, तब भीमपुरा के ही रहने वाले भंवर खां ने उनकी जमीन पर अवैध बजरी का बड़ा ढेर लगा दिया। वापस लौटने पर जब पीड़ित ने अपनी जमीन से बजरी हटाने को कहा, तो आरोपी ने कहा कि यहां पर जल संसाधन विभाग का काम होना है। सभी बजरी की रॉयल्टी रसीद है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग के अधिकारियों ने तुरंत फोरमैन को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद फोरमैन जोगाराम मौके पर पहुंचे। कार्रवाई करते हुए विवादित भूमि पर अवैध रूप से डंप की 360 टन बजरी को जब्त कर लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बनेड़ा थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।

पूछने पर दी धमकी

जब पीड़ित ने इस संबंध में मालूमात की तो पता चला कि उसी के गांव के रहने वाले भंवर खां पुत्र धन्ने खां ने उसकी कृषि भूमि को नष्ट करने और उसे झूठा फंसाने की नीयत से यह बजरी वहां डलवाई है। शिकायत पत्र के अनुसार जब पीड़ितशाहजाद ने आरोपी भंवर खां को उलाहना दिया और अपनी जमीन से बजरी हटाने को कहा, तो आरोपी ने साफ इनकार कर दिया। आरोपी ने धौंस जमाते हुए कहा कि मैं बजरी का ठेकेदार हूं मेरी मर्जी आएगी तब हटाऊंगा।

पुलिस अधीक्षक से सख्त कार्रवाई की मांग

बजरी माफिया की इस दबंगई और झूठे केस में फंसाने की धमकी से डरे-सहमे पीड़ित ने भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है। प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि बनेड़ा थाना पुलिस को आरोपी भंवर खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, उसे गिरफ्तार करने और खेत से तुरंत अवैध बजरी का स्टॉक हटवाने के आदेश प्रदान किए जाएं।

सवाल जो उठ रहे हैं:

इस घटना ने क्षेत्र में बजरी ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बजरी ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे किसानों की निजी खातेदारी जमीनों पर अवैध स्टॉक कर रहे हैं। आरोपी द्वारा ‘पुलिस में अच्छी जान-पहचान’ होने का दावा क्या किसी मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।