संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को नागौर सांसद और आरएलपी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल अपने पुराने तेवर में नजर आए। संविधान 131वें संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान बेनीवाल ने केंद्र की एनडीए सरकार पर ‘छल-कपट’ का आरोप लगाते हुए सामाजिक न्याय की नींव हिलाने की बात कही। उन्होंने साफ किया कि लोकतंत्र केवल ‘नंबर गेम’ नहीं बल्कि ‘विश्वास’ का नाम है, जिसे यह सरकार लगातार तोड़ रही है।
‘महिला आरक्षण मंजूर, लेकिन OBC का हक क्यों छीना?‘
बेनीवाल ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है और महिलाओं को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए। लेकिन, सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ओबीसी, दलित, आदिवासी और कमजोर प्रतिनिधित्व वाले मुस्लिम समाज को नुकसान पहुँचाने वाला परिसीमन ला रही है।
उन्होंने मान्यवर कांशीराम के नारे ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ को दोहराते हुए जातिगत जनगणना के बिना किए जा रहे बदलावों पर सवाल उठाए।
राजस्थान का गणित: 48 सीटें मिलनी चाहिए, मिलेंगी सिर्फ 38?
सांसद बेनीवाल ने राजस्थान के हक की लड़ाई लड़ते हुए सदन में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा:
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या 6.85 करोड़ थी।
इस आधार पर राजस्थान में 48 लोकसभा सीटें बननी चाहिए।
लेकिन यदि सरकार सभी राज्यों में समान रूप से 50% सीटें बढ़ाती है, तो राजस्थान के हिस्से में केवल 38 सीटें आएंगी।
इस तरह राजस्थान को सीधे तौर पर 10 लोकसभा सीटों का नुकसान होगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि राजस्थान की जनता के साथ यह भेदभाव क्यों?
RLP MP Hanuman Beniwal
हनुमान बेनीवाल के 7 सुलगते सवाल:
सदन में बेनीवाल ने मोदी सरकार के सामने सात ऐसी चुनौतियां रखीं, जिनका जवाब फिलहाल सरकार के पास भी नहीं दिखा:
इन विधेयकों को लाने से पहले पर्याप्त पब्लिक कंसल्टेशन क्यों नहीं लिया गया?
बिल को इतनी जल्दबाजी में क्यों लाया गया कि सांसदों को अध्ययन का समय तक नहीं मिला?
क्या यह बिल संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता?
क्या यह कदम देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) को कमजोर नहीं करता?
क्या सरकार दक्षिण भारत और संतुलित जनसंख्या वाले राज्यों के हितों की रक्षा करेगी?
क्या संसद में प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ने से रोका जाएगा?
परिसीमन आयोग में ज्यूडिशियल रिव्यू (Judicial Review) की सीमा क्या होगी?
‘चुनावों के बीच बिल लाना केवल दिखावा’
बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव और आचार संहिता के बीच यह बिल लाना स्पष्ट करता है कि सरकार केवल दिखावा करना चाहती है। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले जातिगत जनगणना करवाए और उसके बाद ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की सीटों को आरक्षित करते हुए उनकी संख्या बढ़ाए, तभी देश में सकारात्मक संदेश जाएगा।