Rajasthan Politics : ‘वसुंधरा राजे को सफाई देने की ज़रुरत नहीं’, BJP की बयानबाज़ी पर ये क्या बोले अशोक गहलोत?

राजस्थान की सियासत में इन दिनों ‘बयानों के तीर’ सरहदों के पार तक जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने जयपुर आवास पर मीडिया से मुखातिब होते हुए एक तीर से कई निशाने साधे। गहलोत ने न केवल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का परोक्ष रूप से बचाव किया, बल्कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की कार्यशैली पर सवाल उठाकर भाजपा की आंतरिक कलह को हवा दे दी है।

वसुंधरा जी को सफाई देने की जरूरत नहीं थी

हाल ही में वसुंधरा राजे द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और उस पर मदन राठौड़ की बयानबाजी पर गहलोत ने कहा, “मेरी नजर में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता ही नहीं थी। लोग उनकी भावनाओं और संदर्भ को अच्छी तरह समझते हैं।” उन्होंने मदन राठौड़ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या किसी प्रदेशाध्यक्ष को बार-बार यह कहना चाहिए कि फलां नेता मुख्यमंत्री बनेगा या नहीं? गहलोत ने कहा कि ऐसे गंभीर फैसले मोदी जी या अमित शाह जैसे राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए छोड़ने चाहिए थे।

‘बीजेपी की दुर्गति सड़कों पर, कांग्रेस है एकजुट’

गहलोत ने भाजपा पर हमला तेज करते हुए कहा, “ये लोग हम पर आरोप लगाते थे कि कांग्रेस में झगड़े हैं, लेकिन आज भाजपा की जो दुर्गति हो रही है, वह सबके सामने है। इनकी स्थिति अब सड़कों पर आ गई है, हर नेता अलग राग अलाप रहा है।” गहलोत ने दावा किया कि राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और प्रदेश की परंपरा के अनुसार अगली बार कांग्रेस की ही सरकार आएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के स्पष्टीकरण देने और उनको लेकर श्री मदन राठौड़ द्वारा की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया :

देखिए, मेरी दृष्टि में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। पहली बात तो यह है कि मैं उनकी पार्टी के मामलों में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता।… pic.twitter.com/MLBlNMcPWk

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) April 13, 2026

भाजपा के भीतर ‘कंट्रोल’ की कमी?

गहलोत ने मदन राठौड़ को व्यक्तिगत रूप से अच्छा व्यक्ति बताया लेकिन संगठन के मोर्चे पर उन्हें घेरा। उन्होंने कहा कि जब ऊपर (पार्टी) का दबाव होता है, तो पता नहीं वे क्या बोल जाएं। भाजपा के भीतर जिस तरह का विरोधाभास दिख रहा है, वह राजस्थान के विकास और राजनीतिक गरिमा के लिए ठीक नहीं है।

‘भारत को बनना चाहिए था विश्वगुरु

मदन राठौड़ द्वारा गहलोत के ‘पाकिस्तान’ संबंधी बयान की आलोचना पर पूर्व सीएम ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “लोग संदर्भ को नहीं समझते। मेरा कहना सिर्फ इतना था कि दुनिया आज भारत की ओर शांति की उम्मीद से देख रही है, लेकिन जब इजराइल-ईरान युद्ध जैसे हालात में शांति की बात पाकिस्तान (इस्लामाबाद) की ओर से आती है, तो एक भारतीय होने के नाते मुझे दुख होता है।”

गहलोत ने आगे कहा कि पाकिस्तान, जिसके इंदिरा गांधी के समय दो टुकड़े हो गए थे और जो आतंकवाद का गढ़ है, वह आज शांति की मध्यस्थता की चर्चा में है। यह अवसर भारत के पास होना चाहिए था क्योंकि भारत की छवि अहिंसा और भाईचारे की है। राठौड़ इस मर्म को नहीं समझ पा रहे, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।