भीलवाड़ा जिले में लंबे समय से बजरी संकट से जूझ रहे निर्माण क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण (सीया) ने भीलवाड़ा जिले के सवाईपुर तहसील में आने वाली दो लीज को माइनिंग प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण क्लीयरेंस (ईसी) जारी करने का निर्णय लिया है। यह मंजूरी राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड के प्रस्तावों को दी गई है।
दो बड़ी लीज पर शुरू होगा काम
जारी ईसी के अनुसार सवाईपुर के सोपुरा,अडसीपुरा और अकोला गांव के पास स्थित प्लॉट नंबर बीजे-04 क्षेत्रफल 76.77 हेक्टेयर तथा अकोला गांव के पास प्लॉट नंबर बीजे -05 का क्षेत्रफल 67.70 हेक्टेयर को हरी झंडी मिल गई है। इन दो लीज से सालाना लाखों टन बजरी का उत्पादन हो सकेगा। इससे बाजार में बजरी की किल्लत कम होने और अवैध खनन पर लगाम लगने की उम्मीद है।
1.5 मीटर से ज्यादा गहरा नहीं होगा गड्ढा
प्राधिकरण ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने के लिए खनन की शर्तों को बेहद सख्त रखा है। खनन की अधिकतम गहराई 1.5 मीटर तक ही सीमित रहेगी। पूर्व में इसे 2.15 मीटर प्रस्तावित किया गया था, लेकिन जल स्तर को बचाने के लिए इसे घटा दिया गया है। खनन विभाग और ठेकेदार को यह सुनिश्चित करना होगा कि पास के गांवों के कुओं का जल स्तर नीचे न जाए। इसके लिए बाकायदा शपथ-पत्र भी लिया गया है। खनन के साथ-साथ वृक्षारोपण और धूल नियंत्रण के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं।
अगले कदम की तैयारी
सीया की बैठकों में आरएसएमएम के प्रस्तावों पर गहन चर्चा के बाद दो लीज को मंजूरी दी है। लेकिन लीज संख्या बीजे-06 क्षेत्रफल 67.70 हेक्टेयर में पेश किए गए कुछ दस्तावेजों में खामियां होने के कारण उसे ईसी देने से फिलहांल इंकार कर दिया है। इस तीसरे लीज में सिलिकोसिस बचाव योजना और प्रदूषण नियंत्रण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
हाईकोर्ट की रोक से अलग लीज
राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर भीलवाड़ा, टोंक में पिछले साल हुए बजरी के ब्लॉक की नीलामी को निरस्त करने को कहा था। इसके चलते भीलवाडा़ जिले में 48 बजरी के प्लॉट को निरस्त कर दिया था। लेकिन राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड को राज्य सरकार ने तीन बजरी की लीज आवंटन करने की घोषणा बजट में की थी। इसके तहत आकोला में तीन लीज आवंटित की थी। इसमें से दो लीज को ईसी मिल गई जबकि एक लीज के लिए कुछ सुझाव समेत आवेदन करने को कहा गया है।