Electricity Supply: खुशखबरी, राजस्थान में किसानों को बड़ी राहत, अब 24 जिलों में दिन में भी मिलेगी बिजली

Farmer Benefits: जयपुर. राजस्थान के किसानों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि अब प्रदेश के 24 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। पहले से 22 जिलों में लागू इस योजना में अब दौसा और करौली जिलों को भी शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से साझा की।

राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को रात्रि की बजाय दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराना है, जिससे खेती को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सके। इस दिशा में सरकार चरणबद्ध तरीके से कार्य कर रही है और वर्ष 2027 तक पूरे प्रदेश में इस योजना को लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस योजना का लाभ

वर्तमान में जयपुर डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग और भरतपुर जिलों में किसानों को दिन में दो ब्लॉक में बिजली मिल रही है। इसके अलावा अजमेर डिस्कॉम के 12 जिलों—अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर, चित्तौड़गढ़ और डूंगरपुर—में भी यह सुविधा उपलब्ध है। वहीं जोधपुर डिस्कॉम के जालौर, सिरोही और पाली जिले भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

विद्युत तंत्र को मजबूत किया

दौसा और करौली जिलों को इस योजना से जोड़ने के लिए विद्युत तंत्र को मजबूत किया गया है। दौसा में 33 केवी के 18 नए ग्रिड सब स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जबकि करौली में 6 नए सब स्टेशन बनाए गए हैं। इसके अलावा ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से हो सके। दोनों जिलों में पीएम कुसुम योजना के तहत 32 मेगावाट क्षमता के 17 सौर ऊर्जा संयंत्र भी स्थापित किए जा चुके हैं।

87,801 कृषि उपभोक्ताओं को सीधा लाभ

इस पहल से दौसा के 52,460 और करौली के 35,341, कुल 87,801 कृषि उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। अब किसानों को रात के समय ठंड या बारिश में सिंचाई करने की मजबूरी नहीं रहेगी। साथ ही जंगली जानवरों के खतरे से भी राहत मिलेगी और किसान अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता सकेंगे। सरकार की यह पहल न केवल किसानों की सुरक्षा और सुविधा को बढ़ाएगी, बल्कि कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी। इसे प्रदेश में कृषि सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।