श्रीगंगानगर। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत इस बार सिर्फ कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन की दिनचर्या और आर्थिक व्यवस्था में भी बड़े बदलाव लेकर आ रही है। जहां एक ओर अस्पतालों और स्कूलों के समय में परिवर्तन होगा, वहीं व्यापारी और नौकरीपेशा वर्ग के लिए आयकर नियमों में ऐसा बदलाव लागू हो रहा है, जिसे समझना बेहद जरूरी है। वरना छोटी सी चूक भी जेब पर भारी पड़ सकती है।
केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू करने जा रही है, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। इस नए कानून का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। खास बात यह है कि टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन नियमों की भाषा और प्रक्रिया को पूरी तरह नया रूप दिया गया है।
भाषा होगी सरल
नए कानून में धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई हैं। साथ ही 23 अध्याय और 16 अनुसूचियां रखी गई हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि भाषा को इतना सरल बनाया गया है कि अब आम व्यापारी और करदाता भी बिना विशेषज्ञ की मदद के नियम समझ सकेगा। अब ‘पिछला वर्ष’ और ‘निर्धारण वर्ष’ जैसे जटिल शब्द इतिहास बन जाएंगे। उनकी जगह ‘टैक्स ईयर’ की नई व्यवस्था लागू होगी, जिससे आय और टैक्स की गणना एक ही फ्रेम में समझ आ सकेगी।
फॉर्म 16 में बदलाव
फॉर्म 16 में बदलाव किए गए हैं। यदि सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक है, तो एचआरए क्लेम के लिए मकान मालिक का पैन नम्बर देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, यदि समय पर बीमा, किराया या होम लोन से जुड़े दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो वेतन से अधिक टीडीएस कट सकता है जो बाद में परेशानी का कारण बनेगा।
पैन के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा
1 अप्रैल से पैन बनवाने या उसमें सुधार के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। अब केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन बनवाने की सुविधा समाप्त हो रही है। साथ ही पैन और टैन के फॉर्मेट में बदलाव कर सुरक्षा को और मजबूत किया गया है।
पारदर्शिता के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ेगी
नई आयकर प्रणाली पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे डेटा अधिक सटीक और प्रक्रिया तेज होगी। लेकिन इसके साथ करदाताओं की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। हर जानकारी सही और समय पर देना जरूरी होगा।
विशेषज्ञों की चेतावनी और सलाह-
‘नया आयकर अधिनियम करदाताओं के लिए राहत भरा कदम है। भाषा सरल होने से समझ आसान होगी और अनावश्यक प्रावधान हटने से विवाद कम होंगे। हालांकि प्रारंभिक दौर में कर सलाहकारों और करदाताओं को नई प्रणाली समझने में समय लगेगा, लेकिन दीर्घकाल में यह बदलाव लाभकारी सिद्ध होगा।’ -अमरचंद कुक्कड़, अध्यक्ष, टैक्स बार एसोसिएशन अनूपगढ़।
सैलरी वालों को सतर्क रहने की जरूरत
‘यह सुधार पारदर्शिता और डिजिटलाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ‘टैक्स ईयर’ की अवधारणा से जटिलता कम होगी। सैलरीड वर्ग को अब अधिक सतर्क रहकर अपने दस्तावेज समय पर जमा करने होंगे, अन्यथा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।’ -रमेश शेवकानी, सचिव, टैक्स बार एसोसिएशन अनूपगढ़।
करदाताओं को रहना होगा जागरूक
‘सरकार ने कानून को सरल बनाने पर ध्यान दिया है, जो सराहनीय है। नई फाइलिंग प्रणाली और फॉर्मेट से डेटा की सटीकता बढ़ेगी। हालांकि एचआरए और पैन नियमों में सख्ती से अनुपालन का दबाव बढ़ेगा, जिससे करदाताओं को अधिक जागरूक रहना होगा।’ -रजत चुघ, सीए।
विवादों में आएगी कमी
‘नया कानून कर प्रशासन को आधुनिक बनाएगा। कम सेक्शन और स्पष्ट भाषा से विवादों में कमी आएगी। डिजिटल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन करदाताओं को समय पर अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा, अन्यथा दंड का सामना करना पड़ सकता है।’ -शुभम धुडिया, सीए।
नई प्रणाली समझना जरूरी
‘यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं बल्कि व्यवहारिक सुधार भी है। करदाताओं को अब रिकॉर्ड में पारदर्शिता और सटीकता पर विशेष ध्यान देना होगा। नए नियमों से टैक्स प्लानिंग का तरीका भी बदलेगा। जो करदाता समय रहते नई प्रणाली को समझ लेंगे, वे अनावश्यक दंड और जटिलताओं से बच सकेंगे।’ -मोहित बजाज, सीए।