राजस्थान विधानसभा में रोडवेज बसों का मुद्दा गरमा गया। कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर द्वारा रोडवेज की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों ने सदन का तापमान बढ़ा दिया। जवाब में परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने आंकड़ों के साथ पिछली कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया और दावा किया कि पहली बार रोडवेज अब मुनाफे की ओर बढ़ रही है।
“भट्टा बैठ गया, विभाग बंद कर दो”: कांग्रेस MLA
विधायक घनश्याम मेहर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों और महत्वपूर्ण रूट्स पर बसें चलाने में नाकाम रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा:
कार्यशैली पर सवाल: रोडवेज कंडक्टर टिकट कम काटते हैं और प्राइवेट बस ऑपरेटरों से मिले रहते हैं।
रूट्स की अनदेखी: नांदोती से घोड़ाचंद्रजी और टोडाभीम से गंगापुर जैसे व्यस्त रूट्स पर रोडवेज की कमी है।
कड़ा प्रहार: मेहर ने कहा कि यदि सरकार व्यवस्था नहीं सुधार सकती, तो इस विभाग का भट्टा बैठ चुका है, इसे बंद ही कर देना चाहिए।
मंत्री का पलटवार: ‘आपने 5 साल में क्या किया?’
परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कांग्रेस विधायक के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि रोडवेज की जर्जर हालत के लिए कांग्रेस की पिछली सरकार जिम्मेदार है।
नई बसों की खरीद: बैरवा ने कहा, “कांग्रेस ने 5 साल में एक भी नई बस नहीं खरीदी। हमारे मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने आते ही 800 नई बसें खरीदकर रोडवेज के बेड़े में शामिल की हैं।”
मुनाफे का दावा: मंत्री ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों के प्रयासों के परिणामस्वरूप आज रोडवेज पहली बार प्रॉफिट की स्थिति में आई है।
ग्रामीण सेवा: निविदाओं (Tenders) के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर प्रक्रिया जारी है और जल्द ही ग्रामीण मार्गों पर बसें दौड़ने लगेंगी।
‘प्राइवेट सांठगांठ’ की होगी जांच
सदन में जब विधायक ने रोडवेज कर्मियों और प्राइवेट बस मालिकों की मिलीभगत की शिकायत की, तो मंत्री ने इसे गंभीरता से लिया। बैरवा ने आश्वासन दिया कि अगर कंडक्टर प्राइवेट बसों को फायदा पहुँचाने के लिए टिकट कम काट रहे हैं या जानबूझकर रोडवेज को देरी से चला रहे हैं, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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यात्री भार और नए रूट्स पर सरकार का पक्ष
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुछ रूट्स पर बसें इसलिए बंद नहीं की गईं कि सरकार नहीं चाहती, बल्कि वहां यात्री भार की कमी थी। उन्होंने विधायक को भरोसा दिलाया कि नांदोती-गंगापुर मार्ग पर यात्रियों के दबाव को देखते हुए नई बसें लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
रोडवेज का भविष्य: निजी सहभागिता या सरकारी मजबूती?
विधानसभा में हुई इस बहस ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार रोडवेज को ‘पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप’ (PPP) और नए टेंडर्स के माध्यम से पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है। नई बसों की आवक और रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल से सरकार का लक्ष्य रोडवेज को घाटे से उबारकर आम आदमी के लिए सबसे सुरक्षित और सुलभ साधन बनाना है।