आरजीएचएस घोटाला : तीन साल की फाइलें खुलीं, 30 डॉक्टर जांच के दायरे में, AI के जरिए हुई ऑडिट में फंसे

सीकर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में अनियमितताओं को लेकर अब सरकार ने पूरी तरह सख्ती का मूड बना लिया है। मुख्यालय स्तर से विशेष जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें कल्याण अस्पताल के सर्जरी, आर्थो, साइकेट्री और पल्मोनरी विभाग के चिकित्सकों की योजना में लिखी पर्चियां खंगाली जा रही हैं। जांच के दायरे में अब जिला मुख्यालय की एक अन्य लैब भी आ गई है।

आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस के जरिए हुई ऑडिट में अस्पताल के इन विभागों में बड़ी संख्या में ऐसी पर्चियां सामने आई हैं, जिनमें जरूरत से ज्यादा महंगी जांच और दवाएं लिखी गईं। जबकि मरीज की पर्ची और लक्षणों के आधार पर इन जांचों की जरूरत ही नहीं थी। जिसके बाद इन मामलों की तुलना मेडिकल गाइडलाइन और क्लेम रिकॉर्ड से की जा रही है।

पर्ची के आधार पर बुलाया जा रहा

मुख्यालय की ओर से पर्ची के आधार पर सीधे चिकित्सकों को बुलाया जा रहा है। जहां चिकित्सकों से पर्ची की लिखावट और जांच लिखने के कारणों को लेकर पूछताछ की जा रही है। मुख्यालय स्तर पर हो रही जांच के अनुसार योजना में जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां संबंधित का निलंबन, रिकवरी की जाएगी। साथ ही मामले में विभागीय जांच होगी।

एफआईआर की तैयारी

आरजीएचएस योजना में वर्ष 2023, 2024 के बाद अब वर्ष 2025 की फाइलों की ऑडिट करवाई जा रही है। ऑडिट के दौरान मिली गंभीर गड़बड़ी को लेकर एसओजी के जरिए एफआईआर करवाने की तैयारी चल रही है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक चिकित्सक ने बताया कि अधिकारियों के साफ निर्देश हैं कि योजना में लापरवाही और खेल किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

30 से अधिक डॉक्टर जांच के दायरे में

प्रारंभिक जांच में पता चला कि सरकारी अस्पताल से पर्ची कटवा कर योजना से अधिकृत लैब में गैर जरूरी जांचे करवाई गईं। जिसके तहत अस्पताल के चार विभागों के 30 से ज्यादा चिकित्सक इसके दायरे में आएंगे। मुख्यालय स्तर पर चार विभागों के अलग-अलग क्लेम रिकॉर्ड की छानबीन की जा रही है।