community railway model: सीकर जिले के रशीदपुर खोरी के जिस स्टेशन पर गुरुवार से पहली ट्रेन चलेगी, उसे पांच साल तक ग्रामीण अपने ‘समर्पण’ से संचालित कर देशभर में अनूठी नजीर पेश कर चुके हैं। 1942 में बने इस स्टेशन को रेलवे ने घाटे के चलते 2004 में बंद किया तो ग्रामीणों ने इसे वापस शुरू करने के लिए जंगी मुहिम छेड़ी थी।
जनप्रतिनिधियों से लेकर रेल अधिकारियों तक पांच साल चक्कर काटने पर 2009 में रेलवे ने स्टेशन अस्थाई तौर पर शुरू कर ग्रामीणों के सामने अपने स्तर पर इसका संचालन कर 40 हजार रुपए मासिक आय देने की शर्त रखी थी। इस पर ग्रामीणों ने कमेटी बनाकर रेलवे स्टेशन का अपने स्तर पर संचालन किया था।
5 लाख से जुटाई सुविधा, घर-घर की अपील
तत्कालीन कमेटी सदस्य प्रताप सिंह ने बताया कि कमेटी ने नजदीकी आठ गांवों में घर- घर जाकर लोगों से ट्रेन से सफर करने का आह्वान किया। पंफलेट बांटे और जगह- जगह पोस्टर लगवाए गए। पांच लाख रुपए का चंदा कर रेलवे स्टेशन पर साफ- सफाई व जल-पान व अन्य सुविधाएं जुटाई। रेलवे की आय की शर्त पूरी करने के लिए मासिक पास रखने वाले ग्रामीणों ने भी टिकट खरीद कर सफर किया।
2015 में हुआ हाईटेक स्टेशन
ग्रामीणों द्वारा स्टेशन के पांच साल सफल संचालन के बाद रेलवे ने 2015 में स्टेशन को 20 करोड़ की लागत से आधुनिक रूप दिया। आमान परिवर्तन के साथ इसे पूरी तरह सैटलाइट सिस्टम पर आधारित स्टेशन बनाया गया, जहां ईआइ व सर्वर रूम सहित विभिन्न तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई। अतिरिक्त लाइन के साथ इसे क्रोसिंग स्टेशन का रूप भी दिया गया।
इनकी रही थी अहम भूमिका
रेलवे स्टेशन को बचाने में सेवानिवृत शिक्षक हनुमान सिंह, शिवपाल सिंह जांगिड़, शिवप्रसाद कुमावत, हरदयाल सिंह बुरड़क, मदन बुरड़क, कल्याणसिंह शेखावत, भागीरथ जांगिड़, केशर सिंह, प्रताप सिंह, देवी सिंह, रामसिंह चौधरी, महादेव जांगिड़, सुरजाराम बुरड़क, सिद्धार्थ, जितेन्द्र, सुभाषचंद्र व महावीर पुराहित सहित कई ग्रामीणों की अहम भूमिका रही।
रेल यातायात व कारोबार को मिलेगी रफ्तार
रशीदपुर खोरी स्टेशन पर ट्रेनों का स्थाई ठहराव रेल यातायात व कारोबार को नई दिशा दे सकता है। सीकर जंक्शन पर जगह की कमी होने पर इसे भविष्य में स्थायी ठहराव वाले जंक्शन के रूप में विकसित कर ट्रेनों का संचालन ज्यादा व सुगम किया जा सकता है। रशीदपुरा में प्याज मंडी होने से किसानों व व्यापारियों को भी इससे फायदा हो सकता है। सैनिकों का क्षेत्र होने से उनके आवागमन में भी आसानी होगी।
याद के लिए सुरक्षित रखवाया पुराना भवन
रसीदपुर खोरी अब आधुनिक स्टेशन का रूप ले चुका है, लेकिन अपने संघर्ष व समर्पण को याद रखने के ग्रामीणों ने इसके पुराने भवन को भी सुरक्षित रखवाया है। अब भी स्टेशन का पुराना भवन नए भवन के साथ ही मौजूद है।