Jodhpur Digital Arrest: SBI की ‘खामोशी’ ले डूबी 1.85 करोड़, PNB की ‘नजर’ ने बचा लिए 22 लाख! पढ़ें रूह कंपा देने वाली कहानी

Jodhpur Cyber Scam: राजस्थान के जोधपुर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने बैंकिंग सुरक्षा और बुजुर्गों की डिजिटल सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कमला नेहरू नगर की रहने वाली 75 वर्षीय सरस्वती माहेश्वरी पिछले 6 दिनों से अपने ही घर में ‘कैद’ थीं, लेकिन यह कैद किसी जंजीर से नहीं बल्कि ‘डिजिटल खौफ’ से बनी थी। साइबर ठगों ने बुजुर्ग महिला का इस कदर ब्रेनवाश किया कि उन्हें अपने आसपास की दुनिया झूठी और मोबाइल स्क्रीन पर बैठे अपराधी असली पुलिस वाले लगने लगे। इस दौरान ठगों ने महिला के बैंक खातों की पूरी जानकारी जुटा ली और उन्हें करोड़ों रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की एक शाखा ने भारी चूक कर दी, जबकि पंजाब नेशनल बैंक की सजगता ने एक बड़ी अनहोनी को रोक लिया।

वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट रखा

इस डिजिटल लूट की शुरुआत तब हुई जब ठगों ने महिला को कानूनी पचड़े में फंसाने की धमकी देकर 6 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट रखा। दहशत के साये में जी रही महिला जब एसबीआई (SBI) की शाखा पहुंची, तो वहां के सिस्टम ने कोई ‘रेड फ्लैग’ जारी नहीं किया। ठगों के इशारे पर महिला ने चेक के माध्यम से 1 करोड़ 85 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। नियमानुसार, किसी बुजुर्ग द्वारा अचानक इतनी बड़ी राशि का ट्रांसफर किए जाने पर बैंक कर्मियों को ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) और संदिग्ध लेनदेन के तहत पूछताछ करनी चाहिए थी, लेकिन वहां कोई सावधानी नहीं बरती गई। यह लापरवाही महिला की जीवनभर की कमाई पर भारी पड़ गई।

बैंक कर्मी विवेक कुमार की नजर उनके चेहरे के खौफ और हाव-भाव पर पड़ी

कहानी में मोड़ तब आया जब ठगों की भूख और बढ़ी और उन्होंने महिला को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में जमा उनकी 22 लाख रुपये की एफडी (FD) तुड़वाने के लिए भेजा। जब महिला पीएनबी पहुंची, तो वहां तैनात बैंक कर्मी विवेक कुमार की नजर उनके चेहरे के खौफ और हाव-भाव पर पड़ी। विवेक को कुछ असामान्य लगा और उन्होंने तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों मुकेश, पंकज और मैनेजर उदय कुमार को सूचित किया। बैंक स्टाफ ने तुरंत समझदारी दिखाते हुए साइबर थाने से संपर्क किया। पुलिस के पहुंचने पर भी महिला इतनी डरी हुई थी कि वह उन्हें भी फर्जी मान रही थी। बाद में जब पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी और पहचान दिखाई, तब जाकर महिला की आंखों से खौफ का पर्दा हटा और वह इस डिजिटल जाल से बाहर आ पाईं।

बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही जोधपुर साइबर पुलिस

जोधपुर साइबर पुलिस अब उन बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही है जिनमें 1.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए हैं। इस मामले ने एक बार फिर बैंकों की भूमिका पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में बैंक ही ‘लास्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ होते हैं। अगर एसबीआई के कर्मचारी पीएनबी स्टाफ जैसी सजगता दिखाते, तो शायद वह बड़ी रकम भी बचाई जा सकती थी। आम लोगों के लिए यह खबर एक सबक है कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर ‘अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। यदि आपके आसपास कोई बुजुर्ग अचानक सहमा हुआ लगे या असामान्य बैंकिंग ट्रांजेक्शन करे, तो वह डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो सकता है।

सिर्फ एक गोल्डन रूल बचा सकता है आपका पैसा…

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं है, इसके बारे में बैंक और पुलिस प्रबंधन लगातार लोगों को सतर्क करता है, लेकिन उसके बाद भी लोग ठगों का शिकार हो रहे हैं। जबकि एक बेहद ही साधारण सा गोल्डन नियम है कि अगर आपको लगे कि पुलिस या किसी भी एजेंसी के जरिए आपको फोन पर धमकाया जा रहा है तो आप तुरंत ही सबसे पहले फोन को काटें और अपने नजदीक के पुलिस स्टेशन पर जाकर इसकी जानकारी दें। अगर पुलिस स्टेशन नहीं भी जा सकते हैं तो 100 या 112 नंबर पर पूरी जानकारी दें ताकि पुलिस खुद आपसे संपर्क कर सके…। अगर आप फिर भी शिकार हो गए हैं और आपका पैसा ठगा गया है तो तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसा बैंक में ब्लॉक कराया जा सके।