बूंदी। पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (राम जल सेतु लिंक परियोजना) के तहत निर्माण कार्यों का सोमवार को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने निरीक्षण किया। वे अधिकारियों के साथ जिले के गुहाटा पहुंचे।
उन्होंने निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट कार्यस्थल पर अभियंताओं से विस्तार से चर्चा की और परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर प्रत्येक बिंदु का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
चल रहा एक्वाडक्ट का निर्माण
रावत ने बताया कि चंबल नदी पर 2.3 किलोमीटर लंबाई में एक्वाडक्ट का निर्माण किया जा रहा है, जिसे जून 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा। राम जल सेतु लिंक परियोजना के प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत 2 हजार 330 करोड़ रुपए की लागत से यह एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है। यह एक ओर कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपल्दा समेल गांव और दूसरी ओर बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गुहाटा गांव को जोड़ेगा।
एक्वाडक्ट की कुल लंबाई 2280 मीटर
इस परियोजना के अंतर्गत कालीसिंध नदी पर निर्मित नवनेरा बैराज से पानी को पंप हाउस के माध्यम से लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मेज बैराज से पंप हाउस और फीडर के जरिए गलवा बांध तक और वहां से बीसलपुर और ईसरदा बांध में जल पहुंचाया जाएगा।
एक्वाडक्ट के निर्माण से आमजन को आवागमन के लिए एक अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा। चंबल नदी पर बन रहे इस एक्वाडक्ट की कुल लंबाई 2280 मीटर है। इसकी चौड़ाई 41.25 मीटर तथा ऊंचाई 7.7 मीटर है। परियोजना का शुभारंभ मई 2025 में किया गया था।
रावत ने अभियंताओं और श्रमिकों का उत्साह बढ़ाते हुए समयबद्ध कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। निरीक्षण के बाद मंत्री रावत ने अभियंताओं के साथ समीक्षा बैठक भी की। इस दौरान जिलाध्यक्ष रामेश्वर मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
सवा तीन करोड़ लोगों को पानी मिलेगा
रावत ने बताया कि ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की लागत से संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना तैयार की गई है। परियोजना के प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की करीब 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा, जिससे प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी।