सीकर.
शेखावाटी के प्रवेश द्वार सीकर में शहरीकरण की बढ़ती रफ्तार के बीच हवेलियां अपनी पहचान खो रही है। परकोटे के भीतर लगातार हवेलियों की जगह नए-नए व्यावसायिक मॉल व आवासीय मल्टीस्टोरी का निर्माण हो रहा है। हवेलियों को संरक्षित करने के प्रयास भी सरकारी दावों से बाहर नहीं निकल पा रहे है। एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार की ओर से फतेहपुर, मंडावा, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़-शेखावाटी व नवलगढ़ की हवेलियों को बचाने के लिए सरकार की ओर से कानून बनाया गया है। इसमें सीकर की हवेलियों को शामिल नहीं किया गया है। यदि सीकर की प्रमुख हवेलियों को शामिल किया जाए तो काफी राहत मिल सकती है। सूत्रों की माने तो पिछले दो सालों में शिक्षानगरी में 50 से अधिक हवेलियाें को तोड़कर मॉल व मल्टीस्टोरी का स्वरूप दिया गया है।
आमदनी का जरिया बने तो थमे बेचान
एक्सपर्ट ने बताया कि हवेलियों को यदि पयर्टन विभाग की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाए तो यह हवेलियां आमदनी का जरिया भी बन सकती है। आमदनी का जरिया बनने पर इनके बेचान को रोका जा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि शेखावाटी में लगातार देशी व विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ रही, ऐसे में हवेलियां को पर्यटन सेक्टर को नया बूस्टर डोज दे सकती है।
सिर्फ बेचान ही दिख रहा समाधान, नहीं तलाश रहे नई राहें
शहर में 70 से अधिक हवेली अब भी खाली पड़ी है। रख-रखाव नहीं होने की वजह से कई हवेली बेहद जर्जर हालात में है। इनमें से कई को नगर परिषद की ओर से नोटिस भी जारी किया हुआ है। एक्सपर्ट का कहना है कि हवेलियों को हेरिटेज लुक देकर पर्यटकों को लुभाया जा सकता है।
इसलिए हमारी हवेली खास
शेखावाटी की हवेलियां कई खासियातों की वजह से पर्यटकों को लुभाती है। यहां की झरौखे वाली हवेलियां, मन को भाते भित्ती चित्र, विश्व प्रसिद्ध फ्रेस्को पेंटिंग आदि खासियत है।शेखावाटी की हवेलियों में कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। यदि सरकार पहल करें तो फिल्म सिटी का हब भी शेखावाटी बन सकती है।