नागौर। एक जिला-एक उत्पाद योजना में शामिल और अपनी विशिष्ट खुशबू के कारण विश्वभर में पहचान बना चुकी नागौरी पान मैथी आज सरकारी उपेक्षा और सिस्टम की उदासीनता के कारण संकट के दौर से गुजर रही है। जीआई टैग की दहलीज पर खड़ी यह फसल नागौर जिले की शान मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर इसे उगाने वाला किसान बाजार और व्यवस्था के अभाव में अपनी मेहनत की उपज सड़कों किनारे औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है। जिले में प्रोसेसिंग यूनिट और व्यवस्थित मंडी नहीं होने से किसानों को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है।
जिले में पान मैथी की खरीद का कोई ठोस मापदंड तय नहीं है। फसल की पूरी खरीद सड़क किनारे या व्यापारियों के गोदामों पर होती है, जहां भाव तय करने का तरीका पूरी तरह अवैज्ञानिक है। व्यापारी हाथ में मैथी लेकर और उसे सूंघकर भाव तय कर देते हैं। न तो कोई ग्रेडिंग चार्ट है और न ही गुणवत्ता मापने का कोई मापदंड। इसका सीधा नुकसान किसानों को होता है, क्योंकि बाजार में ऊंचे दामों पर बिकने वाली मैथी को व्यापारी ‘क्वालिटी’ के नाम पर कम दाम में खरीद लेते हैं।
मूंडवा मंडी : पांच साल से सिर्फ कागजों और चारदीवारी में कैद
मंडी शुरू होने का किसान पिछले पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। मंडी के लिए जमीन आवंटित हो चुकी है। चारदीवारी का निर्माण भी करा दिया गया है, लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया ठप पड़ी है। न तो यहां भूखंडों की नीलामी हुई है और न ही सरकारी खरीद शुरू हो सकी है। किसान आज भी इस मंडी के शुरू होने की राह ताक रहे हैं, ताकि उन्हें व्यापारियों के चंगुल से आजादी मिल सके।
प्रोसेसिंग यूनिट लगने पर मिलेगा वाजिब दाम
जानकारों का मानना है कि यदि नागौर जिले में पान मैथी की आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाए, तो किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। वर्तमान में कच्ची मैथी बाहर जाती है और वहां प्रोसेस होकर महंगे दामों पर बिकती है। यदि जिले में ही सफाई, सुखाने और पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध हो, तो नागौरी पान मैथी की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और किसानों की आय में इजाफा होगा।
किसानों की यह हैं मुख्य मांगें
मूंडवा मंडी में स्थानीय भूखंडों की नीलामी कर खरीद प्रक्रिया शुरू की जाए।
जिले में सरकारी स्तर पर या पीपीपी मोड पर प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाए।
मैथी की खरीद के लिए आधिकारिक ग्रेडिंग और गुणवत्ता मानक तय किए जाएं।
सड़क किनारे असुरक्षित और अनियंत्रित खरीद पर रोक लगाई जाए।
किसानों का दर्दः उनकी जुबानी
सड़क किनारे बेचने की मजबूरी
हम महीनों की मेहनत करके पान मैथी तैयार करते हैं, लेकिन उसे सड़क किनारे व्यापारियों के रहमो-करम पर बेचना पड़ता है। कोई सरकारी कांटा नहीं है। व्यापारी अपनी मर्जी से भाव कम-ज्यादा कर देते हैं। अगर मूंडवा मंडी शुरू हो जाए, तो हमें हमारी मेहनत का सही मोल मिल सकता है।
सहदेवराम मण्डा, प्रगतिशील किसान, दरिया कलां
प्रोसेसिंग बिना सब अधूरा
नागौरी मैथी की मांग पूरी दुनिया में है, लेकिन फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। सरकार सिर्फ जीआई टैग की बातें करती है, लेकिन धरातल पर न प्रोसेसिंग यूनिट है और न ही लैब। जब तक वैज्ञानिक तरीके से ग्रेडिंग और सरकारी मंडी में बोली शुरू नहीं होगी, किसान ऐसे ही लुटता रहेगा। प्रशासन को जल्द से जल्द भूखंडों की नीलामी कर खरीद शुरू करानी चाहिए।
सुरेन्द्र भाकल, युवा किसान, जनाला