जैसलमेर: हनुमान चौराहा-कलेक्ट्रेट मार्ग पर ऊंचे डिवाइडर बनेंगे संकट की दीवार, हर दिन 20 हजार होंगे परेशान

जैसलमेर शहर के हनुमान चौराहा क्षेत्र में राजकीय जवाहिर अस्पताल के सामने प्रस्तावित डिवाइडर निर्माण कार्य को लेकर शहरवासियों में चिंता और असंतोष बढ़ रहा है। नागरिकों का मानना है कि अस्पताल जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में बिना कट और ऊंचा डिवाइडर सुविधा नहीं, बल्कि संकट की नई लकीर खींचेगा। इस मार्ग से प्रतिदिन अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों, परिजनों, स्थानीय निवासियों, वाहन चालकों और राहगीरों सहित लगभग 10 हजार लोग सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। यहां स्थित राजकीय जवाहिर अस्पताल में हर समय आपात हालात बने रहते हैं। एंबुलेंस, निजी वाहन, ऑटो, दुपहिया और राहगीर यहां से लगातार आवाजाही करते हैं। यदि अस्पताल के ठीक सामने डिवाइडर में कट या यू-टर्न की व्यवस्था नहीं की गई, तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में अनावश्यक देरी होगी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आपात स्थिति में कुछ अतिरिक्त मिनट भी भारी पड़ सकते हैं और यह देरी सीधे तौर पर मरीज की जान पर खतरा बन सकती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार डिवाइडर का उद्देश्य यातायात को सुरक्षित और सुव्यवस्थित करना होता है, लेकिन अस्पताल क्षेत्र में यह उद्देश्य उलट होता नजर आ रहा है। कट विहीन डिवाइडर के कारण वाहनों को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे समय और ईंधन की बर्बादी के साथ घबराहट बढ़ेगी, जो दुर्घटनाओं की आशंका को और गहरा कर देगी। लोगों का कहना है कि यह केवल यातायात व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा विषय है।

खतरा: अचानक ब्रेक, भ्रम और टकराव की स्थिति

डिवाइडर पर प्रस्तावित ऊंची रेलिंग को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कुछ मार्गों पर पहले ही यह अनुभव सामने आ चुका है कि अत्यधिक ऊंचे डिवाइडर्स के कारण दोनों ओर से आने वाले वाहन चालकों की दृश्यता कम हो जाती है। सामने से आ रहे वाहन समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे अचानक ब्रेक, भ्रम और टकराव की स्थिति बनती रही है। दृश्यता घटने से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि वही डिजाइन अस्पताल के सामने दोहराई गई, तो यह इलाका गंभीर रूप से दुर्घटना-संवेदनशील बन जाएगा।

… तो घटेगा संकट, मिलेगा सुविधा

-अस्पताल के सामने डिवाइडर की ऊंचाई सीमित रखी जाए और रेलिंग का स्वरूप ऐसा हो, जिससे सडक़ के दोनों ओर स्पष्ट दृश्यता बनी रहे।
-जवाहिर अस्पताल के मुख्य प्रवेश के सामने अनिवार्य रूप से कट दिया जाए, ताकि एंबुलेंस और अन्य आपात वाहन बिना किसी बाधा के सीधे अस्पताल तक पहुंच सकें।

स्वर्णनगरी के मुख्य व व्यस्त मार्गों में से एक इस मार्ग पर सुरक्षा, सुविधा और संवेदनशीलता का संतुलन हो।
हकीकत यह भी: सुविधा के साथ सुरक्षा की भी दरकार
शहर में पर्यटन सीजन से पहले प्रमुख चौराहों के नवनिर्माण और सौन्दर्यकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। पीले जैसलमेरी पत्थर से बने सर्किल शहर की छवि निखारने का प्रयास हैं, लेकिन नागरिकों का कहना है कि सौंदर्य के साथ-साथ आमजन की सुरक्षा और जरूरतों को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है। अनुभवों की अनदेखी कर किया गया निर्माण भविष्य में न केवल आम नागरिकों के लिए परेशानी बनेगा, बल्कि जिम्मेदारों के लिए भी जवाबदेही के सवाल खड़े करेगा।

नहीं दिखेगा रास्ता, बढ़ेगी घबराहट

रोज मरीजों को अस्पताल लाया जाता है। कई बार हालत गंभीर होती है और हर क्षण मायने रखते हैं। अगर डिवाइडर में कट नहीं होगा और सामने का रास्ता साफ नहीं दिखेगा, तो देरी और घबराहट बढ़ेगी। आपात स्थिति में ऊंचा डिवाइडर हादसे की आशंका भी बढ़ाएगा।

-पंकज भाटिया, स्थानीय निवासी

विकास ऐसा हो कि लोग भी सुरक्षित रहे

ऊंचे रोड डिवाइडर्स के कारण गल्र्स स्कूल मार्ग पर सामने से आने वाले वाहन साफ दिखाई नहीं देते थे और अचानक ब्रेक लगानी पड़ती थी। कई बार टक्कर होते-होते बची। यदि अस्पताल के सामने भी बिना कट और ऊंची रेलिंग वाला डिवाइडर बना, तो हादसे तय हैं। विकास ऐसा होना चाहिए जो लोगों की जान सुरक्षित रखे।

-राजेंद्रसिंह, निजी वाहन चालक

जमीनी सच्चाई देखकर लिया जाए निर्णय

अस्पताल क्षेत्र में हर मिनट की कीमत होती है। किसी मरीज को तुरंत पहुंचाना हो और वाहन को लंबा चक्कर लगाना पड़े, तो यह अमानवीय स्थिति होगी। महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। प्रशासन को जमीनी सच्चाई देखकर निर्णय लेना चाहिए।

-सुनीता कंवर, स्थानीय निवासी

सुरक्षा व संवेदनशीलता जरूरी

शहर में पहले घट चुके हादसे चेतावनी थे, लेकिन उन्हें भुला दिया गया है। ऊंची रेलिंग से दृश्यता खत्म होती है। अस्पताल के सामने कट न देना आपात सेवाओं में सीधी बाधा है। विकास वही सार्थक है, जिसमें सुरक्षा और संवेदनशीलता शामिल हो।
-अशोक कुमार, निजी व्यवसायी