जयपुर। बॉर्डर-2 में अभिनेता वरुण धवन ने जिन मेजर होशियार सिंह दाहिया की रीयल लाइफ को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है, उनका जयपुर से भी जुड़ाव रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद वे करीब 10 वर्ष तक जयपुर में रहे हैं।
जरपाल नामक जगह पर कब्जा करने के दौरान मेजर होशियार सिंह गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इसके बावजूद भी मैदान ए जंग छोडकऱ जाने से इनकार कर दिया।
इसी अदम्य साहस को देखते हुए उन्हें सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया था।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद होशियार सिंह ने खातीपुरा के कृष्णा कॉलोनी में मकान बनवाया और अपने घर का नाम भी जरपाल हाउस रखा।
इतना ही नहीं, 30 मार्च, 2021 को वैशाली नगर के क्वींस रोड का नाम पीवीसी कर्नल होशियार सिंह मार्ग रखा गया था। विजय द्वार के बाहर उनकी प्रतिमा भी सेना ने लगवाई है।
पाकिस्तान के सीमावर्ती शहर पर किया था कब्जा
फिल्म में जिस जरपाल का जिक्र किया, उसे भारतीय सेना ने दुश्मनों की कब्रगाह बना दिया था। यहां पाकिस्तान के कमांडिग अधिकारी सहित 85 जवान मारे गए थे। इस लड़ाई में पाकिस्तान के कई टैंक भी क्षतिग्रस्त हुए थे।
कर्नल (तत्कालीन मेजर) होशियार सिंह ने बसंतर नदी को पार कर जरपाल (पाकिस्तान में एक सीमावर्ती शहर) नामक जगह पर कब्जा किया था। उनके नेतृत्व में दुश्मन के कई काउंटर अटैक को भारतीय सेना की राइफल कम्पनी ने मुंहतोड़ जवाब दिया था।
घर के सदस्यों में भी रहते थे उत्साह
-हमारे गांव में एक कहावत है हम पूजा भले ही राम की करें, लेकिन तेवर परशुराम के रखते हैं….ये डायलॉग वरुण धवन ने फिल्म में बोला है। होशियार सिंह के बेटे विजय सिंह की मानें तो वे जवानों को मॉटिवेट रखने के लिए इस तरह की बातें करते थे। जब वे घर पर रहते थे तब भी इस तरह की बातें परिवार के सदस्यों के साथ करते थे।
-फिल्म में धन्नो देवी के किरदार को अनपढ़ दिखाया है। इस पर उनके बेटे विजय सिंह बताते हैं मां की पढ़ाई लिखाई नहीं हुई। उनको भी हिन्दी सिखाई वो मामा रामफल ने सिखाई है। विजय सिंह बताते हैं कि वर्ष 2011 में फिल्म निर्देशक जेपी दत्ता ने उन्हें मुम्बई बुलाया था और पिता की कहानी को सुना था।
पत्नी कर चुकी हैं एक्टिंग की तारीफ
फिल्म प्रमोशन के दौरान अभिनेता वरुण धवन दाहिया की पत्नी धन्नो देवी और उनके बेटे कर्नल सुशील कुमार दाहिया से भी मिले थे। बातचीत का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें अभिनेता के एक्टिंग की दाहिया की पत्नी तारीफ कर रही हैं और एक्टिंग के लिए शाबाशी भी दी।
खास-खास
-पांच मई, 1936 को सोनीपत के गांव सिसाना में जन्म हुआ था जन्म
-वर्ष 1958 वें सेवा में भर्ती हुए थे, 1963 में 3ग्रिनेडियर्स में प्राप्त किया था कमीशन
-वर्ष 1988 में सेवानिवृत्त होने के बाद जयपुर में मकान बनाया
-छह दिसम्बर, 1998 में वे मरुधरा पर ली थी अंतिम सांस