खुहड़ी में होगा सूर्यास्त तो पर्यटन का होगा भाग्योदय.. धोरों का नया विकल्प

विख्यात सम के धोरों के विकल्प के रूप में अब खुहड़ी क्षेत्र में पर्यटन की नई संभावनाएं तलाशी जा रही है। भीड़ के दबाव और यातायात नियंत्रण के लिहाज से आगामी मरु महोत्सव का समापन इस बार सम के रेतीले धोरों की बजाय खुहड़ी के धारों पर किया जाएगा। यह एक बड़ा कदम है। इससे पहले मरु महोत्सव का समापन पारम्परिक रूप से प्रतिवर्ष सम सेंड ड्यून्स क्षेत्र में ही होता रहा है। गौरतलब है कि गत 21 जून 2025 को राजस्थान का प्रदेश स्तरीय अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम भी जैसलमेर के पर्यटन स्थल खुहड़ी के धोरों पर किया गया था। जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुहड़ी में योगाभ्यास कर पर्यटन को बढ़ावा देने का इरादा जताया था। पिछले कुछ वर्षों में सांस्कृतिक संध्या, ऊंट सफारी, कैम्पिंग और ग्राम्य अनुभव से खुहड़ी पर्यटन की नई दिशा विकसित हुई है। जिला प्रशासन के प्रयासों से खुहड़ी से डीएनपी की पाबंदियों को सीमित कर दिया गया है। इस जगह को सैलानियों के लिए व्यवस्थित विकल्प बनाया जा रहा है।

खुहड़ी को बढ़ावा देने की कवायद

जैसलमेर मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खुहड़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास सरकार के स्तर पर जारी हैं। पूर्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सैकड़ों लोगों के साथ खुहड़ी के धोरों पर योग किया था। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में आई महिलाओं ने भी योग दिवस आयोजन में भाग लिया था। योग कार्यक्रम खुहड़ी की ब्रांडिंग और पर्यटन विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया और अब मरु महोत्सव का समापन वहां किया जाना भी इसकी एक और कड़ी है। राज्य सरकार की मंशा है कि सम की तरह खुहड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैलानियों के लिए पसंदीदा गंतव्य बने। गौरतलब है कि खुहड़ी और उसके पास में बरना में धोरों की लहरदार बनावट सम से कम नहीं है, लेकिन अब तक यह इलाका पर्यटन मानचित्र पर पीछे रहा है।

सडक़ निर्माण से आएगी तेजी

जैसलमेर से म्याजलार तक भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत सडक़ का वर्षों तक रुका हुआ कार्य गत अर्से शुरू करवाया गया है। इससे जैसलमेर से खुहड़ी के लिए दोहरा सडक़ मार्ग तैयार हो जाएगा। अब तक वहां तक एकल सडक़ होने से पर्यटन गतिविधियां सिमटी हुई रही थी। पर्यटन के जानकार इंद्रसिंह बारहठ का कहना है कि सम में पर्यटन सीजन के दौरान भीड़ बेकाबू हो जाती है। यदि खुहड़ी को एक व्यवस्थित विकल्प के रूप में विकसित किया गया तो सैलानियों का दबाव संतुलित होगा और उन्हें नया अनुभव भी मिलेगा। खुहड़ी तक पहुंच भी सम जितनी ही आसान होने वाली है।